Imran Khan News: पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की सेहत को लेकर बढ़ती अफवाहों और उनके परिवार की तरफ से पूर्व पीएम के जिंदा होने का सबूत मांगने के बाद आखिरकार पाकिस्तानी सरकार जनता के आगे झुक गई है। रावलपिंडी की अदियाला जेल के अधिकारियों ने मंगलवार (2 दिसंबर) को पूर्व प्रधानमंत्री की बहन उजमा खानुम को उनसे मिलने की इजाजत दे दी। उजमा खानुम मंगलवा शाम को जेल में दाखिल हुईं। उनके साथ आए PTI के कई समर्थक भारी प्रदर्शन कर रहे थे।
यह मुलाकात तब हुई जब PTI ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट और अदियाला जेल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इसमें इमरान खान के मिलने के अधिकारों पर पाबंदियों का आरोप लगाया गया। पार्टी ने दावा किया है कि उनके परिवार के सदस्यों और सीनियर नेताओं को कई हफ्ते से उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी। पिछले सप्ताह इमरान खान के बेटे और बहन दोनों ने जेल में बंद PTI के संस्थापक के जिंदा होने का सबूत सार्वजनिक रूप से मांगा है। इस बीच जेल के दौरान उनकी हालत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
इमरान खान की मौत की अफवाहें तब और तेज हो गईं जब कथित तौर पर उनकी बहनों को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई। जबकि कोर्ट ने परिवार को उनसे मिलने की इजाजत देने का आदेश दिया था। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के चीफ मिनिस्टर सोहेल अफरीदी के मुताबिक, 27 अक्टूबर से किसी को भी PTI फाउंडर या उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है।
इमरान के बेटे कासिम खान ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को 845 दिनों से हिरासत में रखा गया है। पिछले छह हफ्तों से उन्हें एक डेथ सेल में रखा गया है जिसमें कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि उनके पिता की बहनों को कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद भी उनसे मिलने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा, "कोई फोन कॉल नहीं हुई। कोई मीटिंग नहीं हुई। जिंदगी का कोई सबूत नहीं मिला। मेरा और मेरे भाई का अपने पिता से कोई कॉन्टैक्ट नहीं हुआ है।"
इस बीच, पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान की वह याचिका सोमवार को खारिज कर दी। इसमें उन्होंने अपने खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून के तहत लगे आरोपों को हटाने का अनुरोध किया था। ये आरोप अलीमा के खिलाफ नवंबर 2024 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दर्ज किए गए मामले का हिस्सा हैं।
हालांकि, जस्टिस अमजद अली शाह ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि आतंकवाद-रोधी अधिनियम (एटीए) की धारा-सात वैध है। अदालत के पास उचित अधिकार क्षेत्र भी है। बाद में सरकारी गवाहों को अगली तारीख के लिए समन जारी करने के बाद सुनवाई चार दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई।