G7 Summit 2025: कनाडा सुधारेगा अपनी गलती, इस बात पर पीएम मोदी और मार्क कार्नी में बनी सहमति

G7 Summit 2025: कनाडा में जी7 आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आतंकवाद पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। 22 अप्रैल को हुआ आतंकवादी हमला न केवल पहलगाम पर हमला था, बल्कि हर भारतीय की आत्मा, पहचान और सम्मान पर भी हमला था। यह पूरी मानवता पर हमला था"

अपडेटेड Jun 18, 2025 पर 8:22 AM
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G7 Summit 2025: बीते एक दशक में पीएम नरेंद्र मोदी की यह पहली कनाडा यात्रा है

G7 Summit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (17 जून) को कनाडा के कनैनिस्किस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली, फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं से मुलाकात की। जी7 आउटरीच सत्र में पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। यह उन सभी देशों के खिलाफ है जो लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हैं। वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए, हमारे विचार और नीतियां स्पष्ट होनी चाहिए। अगर कोई देश आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।

कनैनिस्किस में जी7 आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आतंकवाद पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। 22 अप्रैल को हुआ आतंकवादी हमला न केवल पहलगाम पर हमला था, बल्कि हर भारतीय की आत्मा, पहचान और सम्मान पर भी हमला था। यह पूरी मानवता पर हमला था।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "एक तरफ हम अपनी पसंद के आधार पर सभी तरह के प्रतिबंध लगाने में तत्पर रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ आतंकवाद का खुलकर समर्थन करने वाले देशों को पुरस्कृत किया जाता है।" पीएम मोदी कनाडा में 51वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में क्रोएशिया के ज़ाग्रेब के लिए रवाना हो गए हैं।


पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से ग्लोबल साउथ के देश अनिश्चितता और संघर्षों से सबसे अधिक पीड़ित हैं। वे खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से संबंधित संकटों से सबसे पहले प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को विश्व मंच पर लाना अपनी जिम्मेदारी समझता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा पर आउटरीच सत्र में भाग लिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एक स्थायी और हरित मार्ग के माध्यम से सभी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही इस उद्देश्य की दिशा में भारत की वैश्विक पहलों जैसे आईएसए, सीडीआरआई और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के बारे में विस्तार से बताया।

वैश्विक दक्षिण की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान देने का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को विश्व मंच पर लाने को अपनी जिम्मेदारी के रूप में लिया है। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने और इसे लागू करने में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण में भारत के अनुभव को दोहराया। उन्होंने AI की चिंताओं से निपटने और क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक शासन के मुद्दों को संबोधित करने का आह्वान किया।

विश्व नेताओं से की मुलाकात

पीएम मोदी ने मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम पार्डो से मुलाकात की और ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं सहित प्रमुख वैश्वि एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा किए। दोनों नेताओं के बीच यह पहली बैठक थी। इसके अलावा पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज से भी मुलाकात की।

पीएम मोदी ने X पर पोस्ट किया, "कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया के अपने मित्र प्रधानमंत्री अल्बनीज से मिलकर अच्छा लगा।" दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ अपनी बातचीत की एक तस्वीर ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें रामफोसा से बात करके खुशी हुई। इससे पहले जी-7 आउटरीच सेशन के लिए यहां पहुंचने पर PM मोदी का कनाडा के उनके समकक्ष मार्क कार्नी ने स्वागत किया।

भारत-कनाडा संबंधों की होगी नई शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनैनिस्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन के मौके पर अपने कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की। अपनी बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा संबंधों की गहराई और महत्व पर जोर दिया। साथ ही आपसी निवेश का हवाला देते हुए और लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा किया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बैठक पर कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने कहा, "हम फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति के लिए आगे बढ़ेंगे।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आज की बैठक महत्वपूर्ण थी। विचारों के स्पष्ट आदान-प्रदान, कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय दमन पर खुली चर्चा इसका उदाहरण हैं। यह पारस्परिक सम्मान, संप्रभुता और विश्वास पर आधारित संबंधों के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक नींव है...हम फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति के लिए आगे बढ़ेंगे..."

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