Operation Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर' से सहम गया था पाकिस्तान, सता रहा था दोबारा हमले का डर; अमेरिकी दस्तावेजों ने खोली इस्लामाबाद की पोल

Operation Sindoor: अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन चलाया था। 6-7 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoK में स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों लश्कर और जैश के कैंप पर सटीक मिसाइल हमले किए

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 9:59 AM
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रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी संस्थानों तक पहुंच बनाने के लिए पाक ने लगभग ₹45 करोड़ खर्च किए

Operation Sindoor: मई 2025 में पाकिस्तान पर भारत के सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिका के FARA दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तान उस समय भारत के हमलों से इस कदर डर गया था कि उसने गुपचुप तरीके से अमेरिका से मदद की गुहार लगाई थी। सार्वजनिक रूप से 'शांति' की बात करने वाला पाकिस्तान पर्दे के पीछे इस बात से डरा हुआ था कि भारत अपनी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह खत्म नहीं की है, बल्कि इसे केवल कुछ समय के लिए 'रोका' है।

अमेरिकी दस्तावेजों के चौंकाने वाले खुलासे

पाकिस्तान सरकार की ओर से अमेरिकी लॉबिंग फर्म 'स्क्वायर पैटन बॉग्स' द्वारा दाखिल दस्तावेजों में कहा गया, 'हमें चिंता है कि पीएम मोदी ने कहा है कि भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई को केवल रोका है, और हमले फिर से शुरू हो सकते हैं।' पाकिस्तान ने दुनिया को बताया कि भारत ने युद्धविराम मांगा था, लेकिन दस्तावेजों से पता चलता है कि भारी नुकसान और अपनी कमजोर स्थिति को भांपते हुए पाकिस्तानी सैन्य कमांडरों ने खुद अमेरिका के जरिए हस्तक्षेप की कोशिश की थी।


'ऑपरेशन सिंदूर' से तोड़ दी आतंक की कमर

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन चलाया था। 6-7 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoK में स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों लश्कर और जैश के कैंप पर सटीक मिसाइल हमले किए। 4 दिनों के तनाव के बाद 10 मई 2025 को दोनों देशों के DGMO के बीच बातचीत के बाद युद्धविराम की घोषणा हुई थी।

वाशिंगटन में पाकिस्तान का 'लॉबिंग ब्लिट्ज'

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी संस्थानों तक पहुंच बनाने के लिए अल्प अवधि में लगभग $5 मिलियन (₹45 करोड़) खर्च किए। पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने ऑपरेशन के दौरान और बाद में अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों से 50 से अधिक बार संपर्क किया ताकि भारत को रोका जा सके।खुद को बचाने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को द्विपक्षीय संबंधों में 'रीसेट', निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच का लालच भी दिया था।

'खून और पानी साथ नहीं बह सकते': भारत का सख्त रुख

भारत ने इस दौरान न केवल सैन्य प्रहार किया, बल्कि पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए सिंधु जल संधि को निलंबित करने और अटारी-वाघा सीमा व्यापार बंद करने जैसे कड़े कदम भी उठाए थे। पीएम मोदी ने संसद में स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई केवल 'रोकी' गई है और किसी भी उकसावे पर दोबारा 'करारा जवाब' दिया जाएगा।

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