भारत और रूस के बीच ₹10000 करोड़ की मिसाइल डील, आसमान में पाकिस्तान और चीन के लिए काल बनेगी R-37M

India-Russia Missile Deal: यह मिसाइल डील खास तौर पर चीन और पाकिस्तान की वायुसेना की रणनीतियों को कमजोर कर देगी। हिमालयी सीमाओं पर चीन पूरी तरह से अपने हवाई सर्विलांस विमानों पर निर्भर है। R-37M मिसाइल सिस्टम के आने से ये विमान फ्रंटलाइन से बहुत दूर रहने को मजबूर हो जाएंगे

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 7:41 AM
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R-37M दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों में से एक है

India-Russia Missile Deal: भारत ने रूस के साथ करीब 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग ₹10,000 करोड़ का एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। इस डील के तहत भारत को रूस की घातक R-37M लंबी दूरी की 'हवा से हवा' में मार करने वाली मिसाइलें मिलेंगी। इसे दक्षिण एशिया के आसमान में 'पावर बैलेंस' बदलने वाला कदम माना जा रहा है। दरअसल भारत अपनी हवाई ताकत को और मजबूत बनाना चाहता है, यही वजह है कि रूस के साथ ये बड़ी डील हुई है।

क्या है R-37M मिसाइल और क्यों है यह खास?

R-37M, जिसे नाटो (NATO) द्वारा 'Axehead' के नाम से भी जाना जाता है। फिलहाल यह दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों में से एक है। यह मिसाइल 300 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी पर मौजूद दुश्मन के विमान को मार गिराने में सक्षम है। इसे विशेष रूप से उन ऊंचे और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है जो सीधे युद्ध में तो नहीं दिखते, लेकिन युद्ध की दिशा तय करते हैं। इस समझौते के तहत भारत को लगभग 300 मिसाइलें मिलने की उम्मीद है।


फाइटर जेट्स नहीं, 'बैकबोन' पर होगा हमला

R-37M का असली मकसद दुश्मन के लड़ाकू विमानों से डॉगफाइट यानी आमने-सामने की लड़ाई करना नहीं, बल्कि उनके पूरे सिस्टम को ध्वस्त करना है। भारत इसके जरिए दुश्मन के इन महत्वपूर्ण विमानों को निशाना बनाएगा:

  • AWACS (Airborne Warning and Control Systems): ये आसमान में उड़ते हुए रडार होते हैं जो पूरे युद्ध क्षेत्र की जानकारी देते हैं। इन्हें 'आसमान की आंखें' कहा जाता है।
  • Refuelling Tankers: हवा में ही ईंधन भरने वाले विमान, जो फाइटर जेट्स की रेंज बढ़ाते हैं।
  • Command Aircraft: वे विमान जो पूरी हवाई कार्रवाई का कोऑर्डिनेशन करते हैं।

पाकिस्तान और चीन के लिए बढ़ी चुनौती

यह मिसाइल डील विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की वायुसेना की रणनीतियों को कमजोर कर देगी। हिमालयी सीमाओं पर चीन पूरी तरह से अपने हवाई सर्विलांस विमानों पर निर्भर है। R-37M के आने से ये विमान फ्रंटलाइन से बहुत दूर रहने को मजबूर हो जाएंगे। वहीं मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के J-10C और JF-17 विमानों ने लंबी दूरी की PL-15 मिसाइलों से भारतीय विमानों को चुनौती देने की कोशिश की थी। R-37M उस कमी को न सिर्फ पूरा करेगी, बल्कि भारत को बढ़त दिलाएगी।

स्वदेशी तकनीक आने तक एक 'मजबूत ढाल'

भारत वर्तमान में अपनी स्वदेशी मिसाइलों जैसे- अस्त्र Mk-2 और Mk-3 पर काम कर रहा है। चूंकि ये अभी विकास के चरण में हैं, इसलिए R-37M एक महत्वपूर्ण 'स्टॉपगैप' के रूप में काम करेगी। रूस द्वारा इस एक्सपोर्ट को मंजूरी देना भारत के साथ उसके गहरे रणनीतिक रिश्तों और बाजार में पकड़ बनाए रखने की कोशिश को दिखाता है।

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