Fighter Jet Deal: जल्द ही फाइनल होने वाली है ₹3.25 लाख करोड़ की राफेल डील, आसमान के 'सिकंदर' से भारत बनेगा रक्षा महाशक्ति

India Rafale Deal: फिलहाल भारतीय वायुसेना अपने स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले महज 29 स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य गठजोड़ और लद्दाख में जारी तनाव को देखते हुए यह डील 'संजीवनी' की तरह है

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 7:45 AM
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इस सौदे के पूरा होते ही भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का बेड़ा होगा

India's Biggest Fighter Jet Deal: भारत और फ्रांस के बीच करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल F4 लड़ाकू विमानों की डील फ्रांस से होने वाली है। यह डील न केवल सरहदों की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि आधुनिक युद्ध कला के क्षेत्र में भारत का दबदबा भी कायम करेगी। यह डील महज एक खरीद नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीतिक साझेदारी है, जिस पर इस महीने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान मुहर लगने की पूरी संभावना है। इस सौदे के पूरा होते ही भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का बेड़ा होगा, जो भारत को दुनिया में फ्रांस से भी बड़ा राफेल ऑपरेटर बना देगा।

तकनीक और घातक मारक क्षमता का मेल है राफेल

इस मेगा-डील के तहत वायुसेना को 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट फाइटर जेट्स मिलेंगे। ये विमान अब तक के सबसे उन्नत 'F4' स्टैंडर्ड के होंगे, जो 'नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर' में बेजोड़ हैं। इस समझौते के तहत 2030 तक विमानों को F5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड करने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे ये विमान 'लॉयल विंगमैन' जैसे घातक लड़ाकू ड्रोन्स के साथ मिलकर मिशन को अंजाम दे सकेंगे।


राफेल की 'ओमनीरोल' क्षमता इसे एक ही उड़ान में हमला करने, जासूसी करने और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बनाती है। इसमें 'कोल्ड-स्टार्ट' सिस्टम जैसे इंडिया-स्पेसिफिक एन्हांसमेंट्स भी होंगे, जो लेह जैसे ऊंचे और बर्फीले इलाकों में भी इसे तुरंत उड़ान भरने की ताकत देते हैं।

नागपुर में बनेगा डिफेंस हब

इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका इंडस्ट्रियल मॉडल है। शुरुआती 18 विमान फ्रांस से सीधे 'रेडी-टू-फ्लाई' हालत में आएंगे, लेकिन बाकी 96 विमानों का निर्माण नागपुर में किया जाएगा। टाटा, महिंद्रा और डायनेमैटिक टेक्नोलॉजीज जैसी 40 से अधिक भारतीय कंपनियां इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। विमान निर्माण में स्वदेशी तकनीक का हिस्सा 30% से शुरू होकर 60% तक पहुंचेगा। इसके अलावा, डसॉल्ट और सफरान भारत में मेंटेनेंस और इंजन की मरम्मत (MRO) के लिए एक बड़ा सेंटर बनाएंगे, जिससे भारत पूरी दुनिया के राफेल विमानों के लिए एक ग्लोबल सर्विस हब बन जाएगा।

फिलहाल भारतीय वायुसेना अपने स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले महज 29 स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य गठजोड़ और लद्दाख में जारी तनाव को देखते हुए यह डील 'संजीवनी' की तरह है। जहां एक ओर भारत अपने स्वदेशी तेजस Mk-2 और पांचवीं पीढ़ी के AMCA विमानों पर काम कर रहा है, वहीं राफेल F4 तब तक भारत की हवाई सुरक्षा की रीढ़ बना रहेगा। इसकी मारक क्षमता इतनी है कि यह दुश्मन के इलाके में घुसे बिना ही उनकी मिसाइलों और विमानों को हवा में ही ढेर कर सकता है।

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