विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सुरक्षा मुद्दों को लेकर बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब किया। हाल ही में कथित तौर पर एक समूह ने भारतीय उच्चायुक्त को धमकी दी, जिसके बाद ये एक्शन लिया गया। नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत के खिलाफ भड़काऊं बयान दिया। इसी के जवाब में नई दिल्ली ने एक डिमार्श ऑर्डर जारी कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसी बीच, बढ़ते तनाव के मद्देनजर बुधवार तड़के ढाका में भारतीय वीजा सेंटर को भी बंद कर दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “बांग्लादेश में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के संबंध में चरमपंथी तत्वों की ओर से फैलाई जा रही झूठी कहानी को भारत पूरी तरह से खारिज करता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतरिम सरकार ने न तो गहन जांच की है और न ही इन घटनाओं के संबंध में भारत के साथ कोई सार्थक सबूत साझा किए हैं।”
News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में 20 मिनट तक मौजूद रहे।
अब्दुल्ला ने सोमवार को चेतावनी दी कि ढाका भारत विरोधी ताकतों, जिनमें अलगाववादी समूह भी शामिल हैं, उन्हें शरण दे सकता है और भारत की "सेवन सिस्टर्स" यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा को अलग-थलग करने की कोशिशों में मदद कर सकता है। उन्होंने ये बातें ढाका के केंद्रीय शहीद मीनार में एक सभा को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा, “हम अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतों को पनाह देंगे और फिर हम 7 सिस्टर्स को भारत से अलग कर देंगे। मैं भारत को यह साफ कर देना चाहता हूं कि अगर आप उन ताकतों को पनाह देते हैं, जो बांग्लादेश की संप्रभुता, क्षमता, मतदान के अधिकार और मानवाधिकारों का सम्मान नहीं करतीं, तो बांग्लादेश भी इसका जवाब देगा।”
उनकी टिप्पणियों का असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कड़ा विरोध जताया, जिन्होंने इन टिप्पणियों को "गैरजिम्मेदाराना और खतरनाक" बताते हुए कहा, "भारत एक बहुत बड़ा देश है, एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बांग्लादेश इसके बारे में सोच भी कैसे सकता है?"
ऐसे ही बयान इससे पहले बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने भी दिए थे। उन्होंने कहा था कि पूर्वोत्तर क्षेत्र “जमीन से घिरा" (landlocked) है, और उन्होंने अपनी चीन यात्रा के दौरान भारत के कुछ इलाकों पर चीन के प्रभाव बढ़ाने की मांग की थी, जिसके लिए उनकी कड़ी आलोचना हुई।