UNSC Resolution: भारत समेत 135 देशों ने ईरान के पड़ोसी मुल्कों पर हमलों की निंदा की, रूस-चीन ने वोटिंग से बनाई दूरी

UNSC Resolution: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत समेत 135 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खाड़ी देशों और जॉर्डन पर हमलों की कड़ी निंदा की। प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाई। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 7:30 PM
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भारत इस प्रस्ताव के को-स्पॉन्सर में शामिल था। भारत के साथ 130 से ज्यादा देशों ने भी इसका समर्थन किया।

UNSC Resolution: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को बहरीन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनाई। UNSC में कुल 15 देशों को वोट देने का अधिकार होता है। इनमें 5 स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं।

भारत इस प्रस्ताव के को-स्पॉन्सर में शामिल था। भारत के साथ 130 से ज्यादा देशों ने भी इसका समर्थन किया। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं।


किन हमलों की निंदा की गई

प्रस्ताव में ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर किए गए हमलों की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा की गई है।

सुरक्षा परिषद ने तेहरान से सभी हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। इसके साथ ही ईरान से पड़ोसी देशों के खिलाफ धमकियां और उकसावे वाली गतिविधियां बंद करने को भी कहा गया है। इसमें प्रॉक्सी समूहों के जरिए की जाने वाली कार्रवाइयां भी शामिल हैं।

समुद्री व्यापार में दखल की भी निंदा

सुरक्षा परिषद ने समुद्री व्यापार और जहाजरानी में दखल देने की धमकियों की भी निंदा की है। इसमें खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या वहां से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की किसी भी कोशिश का जिक्र किया गया है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्गों पर व्यापारी जहाजों के नेविगेशन अधिकार और उनकी स्वतंत्र आवाजाही का सम्मान किया जाना चाहिए।

सुरक्षा परिषद ने प्रभावित देशों के साथ एकजुटता भी जताई। साथ ही रिहायशी इलाकों और नागरिक ढांचे पर हुए हमलों की भी निंदा की, जिनसे आम लोगों की मौत हुई और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

अमेरिका ने क्या कहा

मतदान के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इस प्रस्ताव का पारित होना खाड़ी देशों की ओर से ईरानी शासन के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा नागरिकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना बेहद निंदनीय है और पूरी दुनिया इसकी आलोचना कर रही है।

वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव बढ़ने से पहले कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की पूरी कोशिश की थी। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति ने शांति की कोशिश की और 47 साल की दुश्मनी और हमलों को खत्म करना चाहा। लेकिन ईरान ने सिर्फ ज्यादा मिसाइलें, ज्यादा ड्रोन और परमाणु संकट की दिशा में कदम बढ़ाया।'

वाल्ट्ज ने कहा कि ट्रंप ने अपनी 'रेड लाइन' स्पष्ट कर दी थी। ईरान ने उसे फिर पार किया और अब पूरी दुनिया इसके नतीजे देख रही है। उन्होंने उन 135 देशों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

ईरान का पलटवार और होर्मुज जलडमरूमध्य

इस बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के उन देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इनमें बहरीन, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये हमले उस समय शुरू हुए जब अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा भी की है। उसने चेतावनी दी है कि वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ा और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

ईरान ने UNSC प्रस्ताव को खारिज किया

हालांकि ईरान ने सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरवानी ने इसे 'अन्यायपूर्ण और अवैध' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इरवानी ने कहा, 'आज निशाना ईरान है, लेकिन कल कोई भी अन्य संप्रभु देश हो सकता है।'

इरवानी के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1,348 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। वहीं 17,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

उन्होंने दावा किया कि हजारों नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। इनमें 16,191 घर, 1,617 व्यापारिक और सेवा केंद्र, 77 मेडिकल और फार्मा संस्थान, 65 स्कूल और शिक्षण संस्थान, 16 रेड क्रेसेंट इमारतें और कई ऊर्जा ढांचे शामिल हैं। इरवानी ने कहा कि इन हमलों का पैमाना और तरीका युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है।

ईरान का अपना पक्ष

इरवानी ने कहा कि हम खाड़ी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और ईरान उनकी संप्रभुता को निशाना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर की गई ईरान की कार्रवाई किसी भी क्षेत्रीय देश की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही इजरायल अमेरिका को इस क्षेत्रीय संघर्ष में खींचने में सफल रहा हो, लेकिन ईरान और उसके पड़ोसी देशों के रिश्ते लंबे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधों पर आधारित हैं। इरवानी ने उम्मीद जताई कि जब मौजूदा तनाव कम होगा तो ईरान और उसके पड़ोसी देश फिर से सहयोग, आपसी सम्मान और अच्छे पड़ोसी संबंधों की दिशा में लौटेंगे।

उन्होंने यह आरोप भी खारिज किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की कोशिश की है। उनके मुताबिक यह दावा पूरी तरह गलत है।

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