भारत ने की पाकिस्तान के खिलाफ एक और एक्शन की तैयारी! FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल कराने का प्लान

भारत न सिर्फ FATF पर पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में डालने के लिए दबाव बना रहा है, बल्कि अब वह विश्व बैंक से मिलने वाली आर्थिक मदद का भी विरोध करेगा। दरअसल, इस साल जनवरी में विश्व बैंक और इस्लामाबाद के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत पाकिस्तान को अगले 10 सालों में 20 बिलियन डॉलर की सहायता दी जानी है

अपडेटेड May 23, 2025 पर 4:07 PM
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भारत सिर्फ FATF पर पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में डालने के लिए दबाव बना रहा है

Pakistan Fatf Grey List: पाकिस्तान से तनाव के बीच अब भारत बड़े एक्शन की तैयारी कर रहा है। भारत आतंकी फंडिंग के मुद्दे को FATF में उठाएगा, जिससे एक बार फिर पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा सके। शुक्रवार को सामने आई एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों की निगरानी करने वाली संस्था FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) से पाकिस्तान को फिर से अपनी 'ग्रे लिस्ट' में डालने की मांग करेगा।

जानकारी के मुताबिक, भारत FATF पर दबाव बना रहा है कि वह पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाले, क्योंकि वह आतंकी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने में नाकाम रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब एक महीने पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या की गई थी। इस हमले में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी और मारे गए ज्यादातर लोग पर्यटक थे।

वर्ल्ड बैंक फंडिंग का विरोध


भारत न सिर्फ FATF पर पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में डालने के लिए दबाव बना रहा है, बल्कि अब वह विश्व बैंक से मिलने वाली आर्थिक मदद का भी विरोध करेगा। दरअसल, इस साल जनवरी में विश्व बैंक और इस्लामाबाद के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत पाकिस्तान को अगले 10 सालों में 20 बिलियन डॉलर की सहायता दी जानी है। यह मदद जलवायु परिवर्तन से निपटने और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने जैसे विकास कार्यों के लिए दी जानी थी। हालांकि, भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को रोकने में गंभीर नहीं है, इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद नहीं मिलनी चाहिए।

क्या है FATF की ग्रे लिस्ट

FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की ग्रे सूची में उन देशों को डाला जाता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और खतरनाक हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने में नाकाम रहते हैं। ऐसे देशों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ा दी जाती है। पाकिस्तान को 2018 में ग्रे सूची में डाला गया था, क्योंकि वह आतंकियों को फंडिंग रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा पाया था। उसे एक कार्य योजना दी गई थी, जिसे समय सीमा के भीतर पूरा करना था। हालांकि, 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया, जिससे वहां की सरकार को वैश्विक संस्थाओं से कर्ज मिलना आसान हो गया।

ग्रे लिस्ट में डाले जाने का मतलब होता है कि उस देश को अपनी कमियों को सुधारने का वादा करना होता है और उस पर लगातार निगरानी रखी जाती है। FATF साल में तीन बार—फरवरी, जून और अक्टूबर में बैठक करता है और इन बैठकों में ऐसे फैसले लिए जाते हैं। अब भारत चाहता है कि FATF पाकिस्तान की गतिविधियों पर फिर से सख्ती करे और उसे ग्रे सूची में डाले।

भारत ने किया विरोध

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का कर्ज देने के फैसले का विरोध किया है। भारत को चिंता है कि इस रकम का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है। 16 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IMF से अपील की कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर दोबारा विचार करे। उनका कहना था कि इस्लामाबाद इस फंड का बड़ा हिस्सा आतंकी संगठनों को मजबूत करने में खर्च कर सकता है।

हालांकि, IMF ने शुक्रवार को अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने सभी जरूरी शर्तें और लक्ष्य पूरे किए हैं, जिनके आधार पर यह कर्ज मंजूर किया गया है। IMF की संचार विभाग की निदेशक जूली कोजैक ने बताया कि संस्था ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान को दी जा रही विस्तारित निधि योजना (EFF) की समीक्षा की थी। इसके बाद, 9 मई को बोर्ड ने 1 अरब डॉलर की राशि को मंजूरी दी।

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