US‑India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने वैश्विक व्यापार की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए 'बंपर लॉटरी' बताया है। इस डील के तहत भारत के विशाल मार्केट में अब अमेरिका से आने वाले अनाज, फल और अन्य कृषि उत्पादों के लिए दरवाजे खुल गए है। इस समझौते के तहत भारत ने वादा किया है कि वह आने वाले समय में अमेरिका से $500 बिलियन से अधिक की खरीदारी करेगा, जिसमें ऊर्जा और कोयले के साथ-साथ हाई-टेक मशीनरी भी शामिल होगी।
'अमेरिकी किसानों के लिए खुले भारत के द्वार'
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अमेरिकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस नई डील के जरिए अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और वहां के किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमतें मिल सकेंगी। रॉलिन्स ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा $1.3 बिलियन था। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी खेती के लिए एक अनिवार्य बाजार है और यह समझौता इस व्यापार घाटे को पाटने में लंबी दूरी तय करेगा।
ब्रुक रॉलिन्स ने व्हाइट हाउस के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से ऊर्जा व कृषि खरीदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है। समझौते के तहत भारत ने $500 बिलियन से अधिक की खरीदारी का जो वादा किया है, उसमें कृषि उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा होगा। रॉलिन्स के अनुसार, यह डील न केवल आर्थिक है बल्कि रणनीतिक भी है, क्योंकि यह अमेरिकी खेती को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन में भारत और अमेरिका की साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।
अब 'मेड इन इंडिया' का चलेगा सिक्का
भारतीय कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। पिछले साल अगस्त से लगे भारी टैक्स की वजह से भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में काफी संघर्ष कर रही थीं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी के अनुरोध पर इसे तत्काल प्रभाव से कम कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए ट्रंप का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं साथ आती हैं, तो प्रगति की नई ऊंचाइयां छूती हैं। अब भारतीय कपड़ा, आईटी सेवाएं और इंजीनियरिंग का सामान अमेरिका में सस्ता मिलेगा, जिससे निर्यात में भारी बढ़ोतरी होगी।
रूस से दूरी और अमेरिका से दोस्ती का नया गणित
इस सौदे का एक दिलचस्प पहलू 'ऊर्जा कूटनीति' है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका तथा वेनेजुएला की ओर रुख करेगा। ट्रंप का मानना है कि रूस की आर्थिक कमर तोड़कर यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में निर्णायक साबित हो सकता है। इसके बदले में भारत को न केवल सस्ता व्यापारिक मार्ग मिला है, बल्कि अमेरिका ने भारत के लिए अपने टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं को भविष्य में 'जीरो' करने का भी संकेत दिया है।
भारतीय कंपनियों और रोजगार पर सीधा असर
टैरिफ कम होने का सीधा फायदा उन भारतीय कंपनियों को होगा जिनका पूरा कारोबार अमेरिका पर टिका है। टैक्स घटने से कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और वे अमेरिकी बाजार में चीन या वियतनाम जैसे देशों को आसानी से मात दे सकेंगी। जानकारों का कहना है कि निर्यात बढ़ने से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई जान आएगी, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। यह डील भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उसे वैश्विक सप्लाई चेन का सबसे भरोसेमंद केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।