ट्रंप की नाक के नीचे से ईरान निकाल ले गया अपने 34 जहाज, होर्मुज में अमेरिका की घेराबंदी हुई ध्वस्त!

इस पूरे घटनाक्रम का असर तेल बाजार पर भी साफ दिखा। इसी बीच ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमला किया और दो कार्गो शिप्स को कब्जे में ले लिया। ईरान का कहना है कि ये जहाज उसके नियमों का पालन नहीं कर रहे थे

अपडेटेड Apr 22, 2026 पर 6:17 PM
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US Iran Hormuz: ट्रंप की नाक के नीचे से होर्मुज से ईरान निकाल ले गया अपने 34 जहाज! अमेरिका की घेराबंदी हुई ध्वस्त (FILE PHOTO)

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर की गई नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) अब कमजोर पड़ती दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के कई तेल टैंकर चुपचाप अमेरिकी निगरानी को चकमा देकर इस इलाके से निकलने में सफल हो गए। करीब 34 ईरानी टैंकर इस ब्लॉकेड को पार कर गए, जिनमें से 19 फारस की खाड़ी से बाहर निकल गए, जबकि 15 जहाज अरब सागर से ईरान की ओर दाखिल हुए।

Dailymail की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि इनमें से 6 टैंकर अवैध तरीके से ईरानी कच्चा तेल (crude oil) ले जा रहे थे, जिसकी मात्रा करीब 1.07 करोड़ बैरल थी। इसकी कीमत लगभग 910 मिलियन डॉलर आंकी गई है, जिससे ईरान को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है।

इसी बीच ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमला किया और दो कार्गो शिप्स को कब्जे में ले लिया। ईरान का कहना है कि ये जहाज उसके नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।


दूसरी तरफ, ट्रंप ने सीजफायर (युद्धविराम) बढ़ाने का ऐलान तो किया है, लेकिन साथ ही ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक दबाव जारी रखने की बात भी कही है, ताकि इस अहम समुद्री रास्ते को दोबारा खोला जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम का असर तेल बाजार पर भी साफ दिखा। कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, वहीं अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चली गई हैं।

ईरान पर दोबारा हमला नहीं करना चाहते ट्रंप!

वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को लेकर अंदरखाने एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।

The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को उम्मीद है कि सैन्य हमले की बजाय आर्थिक दबाव डालकर ही ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों से हमले के विकल्प पर चर्चा जरूर की, लेकिन फिलहाल उन्होंने सीधा हमला करने के बजाय “प्रेशर स्ट्रैटेजी” जारी रखने का फैसला किया है।

वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप इस बात को लेकर भी सतर्क हैं कि यह युद्ध अमेरिकी जनता के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। यही वजह है कि वे संघर्ष को लंबा खींचने से बचना चाहते हैं।

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