ईरान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा झटका! सीक्रेट हथियार से मार गिराया करोड़ों का सुपरड्रोन, जानें क्या है 'आराश-ए कमांगीर'?

Iran Shot Fown US Drone: ईरान के इस नए हथियार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका नाम ईरान की लोककथाओं के एक महान तीरंदाज 'आराश' के नाम पर रखा गया है, जो सीमाओं की रक्षा के लिए जाना जाता था। जानकारी के मुताबिक, यह कोई बहुत बड़ी हाइटेक क्रांति नहीं है, बल्कि ईरान की एक खास रणनीति का हिस्सा है

अपडेटेड May 29, 2026 पर 4:01 PM
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पूरी दुनिया के सैन्य एक्सपर्ट्स के बीच ईरान की इस गुप्त ताकत को लेकर बहस छिड़ गई है

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच मिडिल ईस्ट से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है। ईरान ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन MQ-9 रीपर को अपने एक सीक्रेट एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खतरनाक अमेरिकी ड्रोन को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 'केश्म द्वीप' (Qeshm Island) के पास ढेर किया गया है। ईरान का कहना है कि उसने अपने घरेलू स्तर पर विकसित 'आराश-ए कमांगीर' (Arash-e Kamangir) एयर डिफेंस सिस्टम का पहली बार सफल ऑपरेशनल इस्तेमाल किया है। इस खबर के बाद से ही पूरी दुनिया के सैन्य एक्सपर्ट्स के बीच ईरान की इस गुप्त ताकत को लेकर बहस छिड़ गई है।

क्या है ईरान का दावा? 


ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना का सबसे भरोसेमंद और अरबों रुपये का MQ-9 रीपर सर्विलांस ड्रोन दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री एनर्जी रूट होर्मुज के पास केश्म द्वीप के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी उसे निशाना बनाया गया।

यह दावा ठीक उस समय आया है, जब कुछ ही समय पहले अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास एक ईरानी सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर यह जवाबी कार्रवाई की है।

क्या है 'आराश-ए कमांगीर' डिफेंस सिस्टम?

ईरान के इस नए हथियार को लेकर स्वतंत्र रूप से बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका नाम ईरान की लोककथाओं के एक महान तीरंदाज 'आराश' के नाम पर रखा गया है, जो सीमाओं की रक्षा के लिए जाना जाता था।

सुरक्षा विश्लेषक एलेक्स अल्मेडा के मुताबिक, यह कोई बहुत बड़ी हाइटेक क्रांति नहीं है, बल्कि ईरान की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह सिस्टम पारंपरिक बड़े रडार स्टेशनों पर निर्भर नहीं रहता, जिन्हें आसानी से बमबारी में नष्ट किया जा सके।

यह बहुत ही मोबाइल यानी आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने योग्य और सस्ता सिस्टम है। यह गर्मी या थर्मल इमेजेस का पीछा करके दुश्मन के विमान को हवा में ही उड़ा देता है।

ईरान के आगे क्यों कमजोर साबित हुआ अमेरिकी 'रीपर ड्रोन'?

MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका का सबसे मारक सर्विलांस और स्ट्राइक ड्रोन माना जाता है. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि फाइटर जेट्स की तुलना में इसकी रफ्तार काफी कम होती है और इसके सर्विलांस मिशन का रूट काफी प्रेडिक्टेबल (जिसका अंदाजा पहले से लगाया जा सके) होता है. पेरिस की साइंसेज पो यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर निकोल ग्रोजेव्स्की के मुताबिक, अगर रीपर ड्रोन इन मोबाइल डिफेंस सिस्टम्स की रेंज में आ जाए, तो इसे मार गिराना बेहद आसान हो जाता है।

क्या है ईरान की नई असिमेट्रिक वॉरफेयर स्ट्रेटेजी?

किंग्स कॉलेज लंदन के सीनियर लेक्चरर मार्क हिल्बोर्न का कहना है कि ईरान ने युद्ध के अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। इजरायल और अमेरिका के लगातार हमलों ने ईरान के बड़े रडार-गाइडेड मिसाइल सिस्टम (जैसे रूसी S-300) को काफी नुकसान पहुंचाया है।

इसके जवाब में ईरान ने 'शाहेद' (Shahed) सीरीज के सस्ते ड्रोन और छोटे मोबाइल मिसाइल लॉन्चर तैनात कर दिए हैं। यह रणनीति अमेरिका और इजरायल जैसे दुश्मनों को मजबूर करती है कि वे ईरान के बेहद सस्ते हथियारों को रोकने के लिए अपने करोड़ों डॉलर के महंगे मिसाइल खर्च करें।

इसके अलावा, जून 2025 में हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद से ईरान ने अपने घरेलू उद्योगों की मदद से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी कहीं अधिक तेजी से बढ़ा लिया है।

इसके क्या हैं बड़े मायने?

भले ही अमेरिका ने अभी तक इस ड्रोन के क्रैश होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी जगह पर ऐसी घटना वैश्विक तेल बाजारों और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यह साफ दिखाता है कि महीनों की बमबारी के बाद भी ईरान की प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है।

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