US Seizure Iran Cargo Ship: ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' (Touska) को अमेरिकी नौसेना द्वारा कब्जे में लिए जाने के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध की चिंगारी फिर से भड़क उठी है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर जहाज और उसके चालक दल को तुरंत नहीं छोड़ा गया, तो इसके 'गंभीर परिणाम' होंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक कड़ा बयान जारी कर इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। तेहरान का दावा है कि यह हमला ओमान की खाड़ी में ईरानी क्षेत्रीय जल सीमा के करीब हुआ, जो ईरान की संप्रभुता पर सीधा प्रहार है। ईरान ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान चालक दल को डराया-धमकाया गया और उन्हें 'बंधक' बना लिया गया है। इसे मानवीय और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन बताया गया है।
सीजफायर समझौते का उल्लंघन
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के खिलाफ है, बल्कि हाल ही में हुए सीजफायर समझौते की शर्तों को भी तोड़ती है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) से इस 'पायरेसी' की निंदा करने और जहाज की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए 'सभी उपलब्ध साधनों' का उपयोग करेगा।
'चेतावनी के बाद लिया एक्शन': ट्रंप
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बात पर कायम रहते हुए सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में थी। ट्रंप के अनुसार, 'तौस्का' ने अमेरिकी नौसेना की रुकने की चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद उसे बलपूर्वक रोकना पड़ा। अमेरिका का मानना है कि यह जहाज नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था, इसलिए इसे जब्त करना आवश्यक था।
'इस्लामाबाद टॉक 2.0' पर मंडरा रहा संकट
यह तनावपूर्ण घटना ऐसे समय में हुई है जब कल यानी बुधवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कल पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाले हैं। 'तौस्का' विवाद इस बातचीत की मेज पर सबसे कड़वा मुद्दा बन सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि 'गंभीर परिणाम' की चेतावनी देकर ईरान ने संकेत दिया है कि वह वार्ता से पहले या उसके दौरान कोई बड़ा सैन्य जवाबी हमला कर सकता है।