Iran Drone Strike: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर खाड़ी के अन्य देशों में भी बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। ईरान मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिका के प्रतिष्ठानों को चुन-चुन कर निशाना बना रहा है। बुधवार तड़के बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एक प्रमुख अमेरिकी राजनयिक सुविधा केंद्र पर ड्रोन हमला हुआ। 'वाशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला ईरान समर्थक मिलिशिया द्वारा किया गया एक जवाबी हमला माना जा रहा है।
ड्रोन हमले के बाद 'डक एंड कवर' का अलर्ट
सुरक्षा अधिकारियों और अमेरिकी विदेश विभाग के आंतरिक अलर्ट के अनुसार, यह हमला काफी सुनियोजित था। हमलावरों ने 'बगदाद डिप्लोमैटिक सपोर्ट सेंटर' (BDSC) को निशाना बनाया, जो अमेरिकी राजनयिकों के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब है।कुल 6 ड्रोन इस परिसर की ओर दागे गए थे। इराक और अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 5 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया।
हालांकि, एक ड्रोन सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए एक 'गार्ड टावर' के पास जा टकराया। धमाके के बाद परिसर में मौजूद कर्मियों को तुरंत 'डक एंड कवर' यानी सिर झुकाकर छिपने का आदेश दिया गया। इसी दौरान बगदाद एयरपोर्ट पर स्थित अमेरिकी 'विक्टोरिया बेस' पर भी कई ड्रोन हमले किए गए।
माना जा रहा है कि बगदाद में हुआ यह हमला 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' द्वारा किया गया है। यह ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों का एक साझा संगठन है, जो इस क्षेत्र से अमेरिकी प्रभाव को खत्म करने की कसम खा चुका है।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का भारी नुकसान
हालांकि इस ताजा हमले में किसी की मौत की खबर नहीं है, लेकिन चल रहे युद्ध में अमेरिकी सेना को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान के खिलाफ जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अब तक लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इनमें से 8 सैनिकों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, जिनका इलाज चल रहा है। ईरान के जवाबी हमलों में अब तक कुवैत और सऊदी अरब में 7 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
'1,300 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत'
दूसरी ओर, ईरान ने इस युद्ध की मानवीय कीमत पर गंभीर आंकड़े पेश किए हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 1,300 से अधिक ईरानी नागरिक मारे गए हैं। ईरान लगातार इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, होटलों, हवाई अड्डों और तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है।