₹2,000,000,000,000 का वो सीक्रेट, जिसके चक्कर में ट्रंप ने ईरान से हाथ तो मिलाया... पर जंग अभी भी है बाकी!

US Iran Peace Deal Updates: यह डील एक तरह से मिडिल ईस्ट में शांति की आधी हकीकत है। सच तो यह है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार इस समझौते (MOU) पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में सिर्फ दस्तखत होने हैं, लेकिन इसकी असली शर्तें अब भी तिजोरी में बंद हैं। ईरान साफ कह चुका है कि जब तक आधिकारिक साइन नहीं होते, वह इसे नहीं मानेगा

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 8:47 AM
अब होर्मुज दोबारा खुलेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा

US Iran Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसे 'शांति समझौते'का ऐलान कर सनसनी मचा दी है। इसने मिडिल ईस्ट की पूरी जियोपॉलिटिक्स को हिलाकर रख दिया है। ट्रंप का दावा है कि युद्ध खत्म हो चुका है, रणनीतिक रूप से संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दोबारा खुलेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।

लेकिन रुकिए! यह आधी हकीकत है। सच तो यह है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार इस समझौते (MOU) पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में सिर्फ दस्तखत होने हैं, लेकिन इसकी असली शर्तें अब भी तिजोरी में बंद हैं। ईरान साफ कह चुका है कि जब तक आधिकारिक साइन नहीं होते, वह इसे नहीं मानेगा। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नाकेबंदी शुक्रवार के बाद ही हटेगी। तो आखिर इस डील के पीछे का असली खेल क्या है? आइए, सबहेड्स के जरिए इसकी पूरी इनसाइड स्टोरी को आसान भाषा में डिकोड करते हैं।

1. क्या सच में थम गई जंग? जानिए डील में क्या-क्या तय हुआ


इस शुरुआती समझौते का सबसे बड़ा मकसद मिडिल ईस्ट में तत्काल जारी सैन्य टकराव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे इसके साइड-इफेक्ट्स को रोकना है:

सैन्य अभियानों पर फुल स्टॉप: मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के मुताबिक, दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने का एलान किया है।

सस्ता होगा क्रूड ऑयल: ईरान महीनों से बंद पड़े 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई बहाल होगी। इस खबर के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतें 4% से ज्यादा टूट गईं।

हटेगी अमेरिकी नाकेबंदी: इसके बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर की गई अपनी सख्त नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लेगा।

2. 60 दिनों का टाइम बम: परमाणु कार्यक्रम का सस्पेंस

यह समझौता सिर्फ एक तात्कालिक 'पुल' है, कोई परमानेंट इलाज नहीं। असली विवादों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का 'सीजफायर पीरियड' रखा गया है, जिसमें सबसे बड़ा रोड़ा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है:

यूरेनियम का खतरनाक स्टॉक: इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास 440.9 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम है जो 60% शुद्धता तक संवर्धित (Enriched) है। इसे हथियार-ग्रेड (90%) तक ले जाने में बस कुछ ही वक्त लगेगा।

अमेरिका बनाम ईरान की जिद: अमेरिका चाहता है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो और यूरेनियम देश से बाहर जाए। दूसरी तरफ, ईरान इसे देश के अंदर ही सिर्फ 'पतला' करने की जिद पर अड़ा है। ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने साफ किया है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान ठोस कदम उठाएगा।

3. $25 अरब के फ्रीज फंड पर 'तू-तू मैं-मैं'

जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को लेकर दोनों देशों के दावों में जमीन-आसमान का अंतर है:

ईरान की शर्त: ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समझौते के अगले चरण के लिए अमेरिका को पहले उनके जब्त $25 अरब डॉलर यानी करीब ₹2 लाख करोड़ रिलीज करने होंगे।

अमेरिका का करारा जवाब: अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन से कहा कि यह सरासर झूठ है। यह एक 'पे फॉर परफॉर्मेंस' डील है; जब तक ईरान अपनी कसमों को पूरा नहीं करता, फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी।

4. ईरान की मिसाइलें और हिज़्बुल्लाह का भविष्य

इस पूरे फ्रेमवर्क में सबसे रहस्यमयी बात यह है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्र में सक्रिय उसके हथियारबंद सहयोगियों का कोई जिक्र नहीं है। महीनों की जंग के बाद भी ईरान का मिसाइल नेटवर्क और क्षेत्रीय दबदबा जस का तस है, जिसे लेकर भविष्य की वार्ताओं में भारी खींचतान होना तय है।

5. इजरायल का 'विलेन' अवतार: क्या नेतन्याहू बिगाड़ेंगे खेल?

इस पूरी डील में इजरायल कहीं शामिल नहीं था। इजरायल का साफ कहना है कि वह लेबनान में अपनी 'कार्रवाई की आजादी' नहीं छोड़ेगा, जो इस सीजफायर की शर्तों के खिलाफ है। ट्रंप ने रविवार को इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर उन्हें 'एक बहुत ही मुश्किल व्यक्ति' बताया और तंज कसा कि नेतन्याहू को उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उन्होंने इजरायल को परमाणु-सशस्त्र ईरान से बचा लिया। लेकिन इजरायल के रुख को देखते हुए यह शांति समझौता बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है।

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