ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से दोबारा खोल नहीं पा रहा है। वजह यह है कि उसने खुद अपनी समस्या खड़ी कर ली है। युद्ध के दौरान ईरान ने इस जलमार्ग में बहुत सारे समुद्री माइंस बिछा दिए थे ताकि जहाजों का आना-जाना बंद हो जाए। अब युद्ध रुक गया है, लेकिन ईरान को ये सारे माइंस ढूंढकर निकालने में दिक्कत हो रही है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान अब तक सभी माइंस का पता नहीं लगा पाया है। कुछ माइंस तो ऐसी जगह लगाए गए थे कि वे पानी में बह सकते हैं या इधर-उधर खिसक सकते हैं। ईरान ने ये माइंस बहुत बेतरतीब तरीके से बिछाए थे। यहां तक कि कुछ माइंस की जगह का रिकॉर्ड भी ईरान के पास सही से नहीं है।
इतनी गंभीर क्यों है ये बात?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल तेल का करीब एक पांचवां हिस्सा (20%) ले जाता है। अगर ये रास्ता बंद रहा तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द इस रास्ते को पूरी तरह खोलो।
पिछले महीने, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ज्वाइंट हवाई हमले किए थे, उसी समय ईरान ने छोटी नावों से होर्मुज में माइंस बिछा दिए थे। अब जब दोनों तरफ सीजफायर हो गया, तो ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह खोलने का वादा किया। लेकिन माइंस की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहा।
इसलिए ईरान ने अब जहाजों को वैकल्पिक रास्ते लेने को कहा है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने एक बयान जारी करके कहा, “जो भी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना चाहते हैं, उन्हें समुद्री सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए। समुद्री माइंस से टकराने के खतरे को देखते हुए वे मुख्य रास्ते की बजाय वैकल्पिक रास्तों से गुजरें।”
ईरान ने वैकल्पिक एंट्री और एग्जिट रूट की भी जानकारी दी है।
अभी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है। इस माइंस की समस्या की वजह से ये बातचीत और भी मुश्किल और जोखिम भरी हो गई है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने जल्दी में सीजफायर स्वीकार किया था, लेकिन अब खुद बिछाए माइंस ही उसकी सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते से दुनिया का करीब 25 प्रतिशत (एक चौथाई) तेल गुजरता है।
भारत के लिए तो यह और भी ज्यादा जरूरी है। भारत जो तेल और ऊर्जा बाहर से मंगाता है, उसका 80 प्रतिशत (करीब 4/5वां हिस्सा) इसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।