Hormuz-Iran: अमेरिका के साथ सीजफायर के बावजूद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से मोटा 'टैक्स' वसूलने और उनकी संख्या सीमित करने की योजना बना रहा है। इस खबर ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है ईरान की प्लानिंग?
युद्ध से पहले इस रास्ते से रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, लेकिन ईरान ने अब नई पाबंदियां लगा दी हैं। ईरान अब एक दिन में केवल 12 जहाजों को ही इस रास्ते से निकलने की अनुमति देने की योजना बना रहा है। साथ ही खाड़ी से गुजरने वाले हर जहाज को अब ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के साथ तालमेल बिठाना होगा। ईरानी अधिकारियों ने समुद्री रेडियो पर चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के गुजरने वाले किसी भी जहाज को तबाह किया जा सकता है। बता दें कि बुधवार को इस रास्ते से मात्र 4 जहाज ही निकल पाए।
सुपरटैंकर से $20 लाख तक की डिमांड
ईरान ने जहाजों के लिए एक 'टियर सिस्टम' यानी श्रेणियों वाला शुल्क ढांचा तैयार किया है। शिपिंग कंपनियों के अनुसार, एक बड़े टैंकर के लिए यह शुल्क $20 लाख यानी करीब 16 करोड़ रुपये तक हो सकता है। खास बात यह है कि ईरान यह वसूली चीनी युआन में कर रहा है, जिससे पश्चिमी देशों का प्रभाव कम होने का खतरा बढ़ गया है।
ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों, विशेष रूप से 'UN Convention on the Law of the Sea' का उल्लंघन है, जो समुद्र में मुफ्त आवाजाही की गारंटी देता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी आपदा से कम नहीं है। ईरान अब परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलों की तरह 'होर्मुज के नियंत्रण' को एक बड़े रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। अगर सप्लाई इसी तरह बाधित रही, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में बड़ी उथल-पुथल मच सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सेना तब तक तैनात रहेगी जब तक ईरान शर्तों का पालन नहीं करता। हालांकि, ईरान के ताजा रुख ने इस सीजफायर को बेहद कमजोर कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती ईरान को यह 'अवैध टैक्स' वसूलने से रोकना होगा।