Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच घोषित 14 दिनों का सीजफायर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान एक 'स्थायी समझौते' की शर्तों को पूरी तरह नहीं मान लेता, तब तक अमेरिकी सेना वहां से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि, ईरान के पास कोई भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला और सुरक्षित होना चाहिए'।
ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश
ट्रंप के अनुसार, सभी अमेरिकी जहाज, विमान, सैन्य कर्मी और भारी मात्रा में गोला-बारूद ईरान के चारों ओर तब तक तैनात रहेंगे, जब तक समझौते का पूरी तरह पालन नहीं होता। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते से पीछे हटा, तो 'गोलीबारी फिर से शुरू होगी' और यह अब तक की सबसे भीषण सैन्य कार्रवाई होगी। ट्रंप ने कहा, 'हमारी महान सेना हथियारों के साथ तैयार है और अपने अगले लक्ष्य का इंतजार कर रही है।'
दो प्रमुख शर्तें: नो न्यूक्लियर और ओपन होर्मुज
ट्रंप ने अमेरिका की पुरानी मांगों को फिर से दोहराया है, जो अंतिम समझौते की बुनियाद होंगी। ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा। खबर है कि अमेरिका, ईरान से जमीन के नीचे दबा हुआ संवर्धित यूरेनियम हटाने को लेकर बातचीत कर रहा है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को हर हाल में सुरक्षित और खुला रखना होगा। ईरान ने हाल ही में इजरायली हमलों के जवाब में इसे फिर से बंद करने की कोशिश की है, जिसे व्हाइट हाउस ने 'पूरी तरह अस्वीकार' बताया है।
लेबनान बना हुआ है विवाद की जड़
भले ही दो हफ्ते की शांति का ऐलान हुआ हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले और तेज कर दिए हैं। बुधवार को वहां 250 से ज्यादा लोग मारे गए, जो इस युद्ध का अब तक का सबसे खूनी दिन रहा। ईरान का कहना है कि लेबनान में शांति सीजफायर का हिस्सा थी, जबकि ट्रंप और नेतन्याहू का कहना है कि लेबनान इस समझौते से बाहर है। मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि सीजफायर लेबनान सहित हर जगह लागू होगा, लेकिन अब वाशिंगटन के रुख ने इस पर भ्रम पैदा कर दिया है।
ईरान ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने अमेरिका पर समझौते की शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि, सीजफायर लागू होने के बाद भी अमेरिकी ड्रोन ने उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया। साथ ही लेबनान पर इजरायली हमले रुकवाने में अमेरिका विफल रहा।