अब खत्म होने वाली है जंग? ईरान ने अमेरिका के सामने रखा नया शांति प्रस्ताव, ट्रंप ने भी दिखाई नरमी
ईरान ने अमेरिका के सामने नया 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है। इसमें प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी सेना हटाने और फंसी संपत्तियां जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं। ट्रंप ने भी सैन्य कार्रवाई रोकने के संकेत दिए हैं, जिससे समझौते की उम्मीद बढ़ी है। जानिए डिटेल।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के नेताओं ने उनसे नए हमले टालने की अपील की थी, क्योंकि 'डील हो सकती है।'
ईरान ने अमेरिका के सामने एक 14 सूत्रीय नया शांति प्रस्ताव रखा है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव सिर्फ परमाणु बातचीत तक सीमित नहीं है। इसमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाने, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियां जारी करने और ईरान के आसपास के इलाकों से अमेरिकी सेना हटाने जैसी कई बड़ी मांगें शामिल हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर दोबारा सैन्य हमले शुरू करने की योजना फिलहाल रोक दी है, क्योंकि समझौते की 'बहुत अच्छी संभावना' दिखाई दे रही है। उसके बाद ईरान का यह प्रस्ताव आया है।
ईरान की बड़ी मांगें क्या हैं?
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने सरकारी एजेंसी IRNA से कहा कि तेहरान का प्रस्ताव 'हर मोर्चे पर' तनाव खत्म करने की बात करता है। इसमें कई मांगें शामिल हैं।
लेबनान में संघर्ष खत्म करना
अमेरिकी प्रतिबंध हटाना
विदेशों में फंसी ईरानी रकम जारी करना
ईरान के आसपास अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी खत्म करना
ईरान ने फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की है।
अमेरिकी सेना हटाने की मांग
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान चाहता है कि उसके नजदीकी इलाकों से अमेरिकी सेना हटाई जाए। यह मांग पहले भी ईरान की तरफ से उठती रही है। हालांकि ट्रंप इससे पहले ईरान के ऐसे प्रस्तावों को 'कचरा' बता चुके हैं।
ट्रंप ने क्या कहा?
इसके बावजूद ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है। Reuters के मुताबिक ट्रंप ने कहा, 'ऐसा लग रहा है कि समझौते की बहुत अच्छी संभावना है। अगर बिना भारी बमबारी किए समाधान निकल जाए, तो मुझे बहुत खुशी होगी।'
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ा दबाव
यह कूटनीतिक गतिविधियां ऐसे समय तेज हुई हैं जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच महीनों से चले संघर्ष की वजह से यह इलाका बुरी तरह प्रभावित रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के नेताओं ने उनसे नए हमले टालने की अपील की थी, क्योंकि 'डील हो सकती है।'
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
Reuters के मुताबिक पाकिस्तान अभी भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुई सीधी शांति वार्ता की मेजबानी भी पाकिस्तान ने ही की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने ईरान का नया प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया है। हालांकि एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि दोनों पक्ष लगातार अपनी शर्तें बदल रहे हैं और 'समय बहुत कम बचा है।'
बातचीत में नरमी के संकेत
Reuters की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हालिया बातचीत में अमेरिका ने कुछ मुद्दों पर नरमी दिखाई है।
इनमें विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों का कुछ हिस्सा जारी करने की बात है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में सीमित शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधि की अनुमति देना शामिल है।
हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने उन रिपोर्ट्स से इनकार किया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका बातचीत के दौरान तेल प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने को तैयार हो गया है।
युद्ध का बड़ा असर
ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच युद्ध ने पूरे क्षेत्र में भारी अस्थिरता पैदा की है। Reuters के मुताबिक बमबारी अभियान के दौरान ईरान में हजारों लोग मारे गए थे। वहीं लेबनान में ईरान समर्थित समूहों से जुड़ी लड़ाई की वजह से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए।
हालांकि अप्रैल में युद्धविराम के बाद हालात कुछ शांत हुए हैं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है। Reuters के मुताबिक हाल में इराक से सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों की तरफ ड्रोन लॉन्च किए गए। शक ईरान समर्थित समूहों पर जताया जा रहा है।
अमेरिका और इजरायल का क्या लक्ष्य था?
ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कई बार कह चुके हैं कि सैन्य अभियान का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना, उसकी मिसाइल क्षमता घटाना और क्षेत्रीय समूहों को मिलने वाले समर्थन को रोकना था।
हालांकि Reuters ने कहा कि महीनों के संघर्ष के बावजूद ईरान अब भी यूरेनियम का बड़ा भंडार रखता है। वह मिसाइल, ड्रोन और सहयोगी समूहों के जरिए क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने की क्षमता बनाए हुए है।