'खुदा का शुक्र है कि वे पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं', ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई नहीं हुए घायल

US Iran War: सूत्रों के अनुसार, ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ही मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि गार्ड्स को लगता था कि वह ऐसे उत्तराधिकारी होंगे, जो उनकी कड़ी नीतियों का समर्थन करेंगे

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 1:26 PM
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US Iran War: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के घायल होने की बात निकली अफवाह!

ईरान में सत्ता से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बारे में फैली चोट लगने की खबरों को खारिज करते हुए सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति ने कहा है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। बुधवार को यूसुफ पेजेश्कियन, जो ईरान के राष्ट्रपति के बेटे होने के साथ-साथ सरकार के सलाहकार भी हैं, ने अपने टेलीग्राम चैनल पर इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि उन्हें खबर मिली थी कि मोजतबा खामेनेई युद्ध के दौरान घायल हो गए हैं, लेकिन उन्होंने अपने कुछ भरोसेमंद संपर्कों से जानकारी ली। उनके मुताबिक, “खुदा का शुक्र है कि वे पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।”

इससे पहले ईरानी सरकारी टीवी ने खामेनेई को “रमजान युद्ध का घायल दिग्गज” बताया था। हालांकि, टीवी रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि उन्हें किस तरह की चोट लगी थी और वो कितनी गंभीर थी।

सूत्रों के अनुसार, ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ही मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि गार्ड्स को लगता था कि वह ऐसे उत्तराधिकारी होंगे, जो उनकी कड़ी नीतियों का समर्थन करेंगे।


सूत्रों का कहना है कि कई वरिष्ठ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इस नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन IRGC ने उनकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए फैसला आगे बढ़ाया। इसी वजह से नए सर्वोच्च नेता की आधिकारिक घोषणा में भी कई घंटे की देरी हुई।

जानकारों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की सत्ता व्यवस्था में IRGC की ताकत पहले से भी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान विदेश नीति में ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकता है और देश के अंदर नियंत्रण भी सख्त हो सकता है।

कुछ वरिष्ठ सूत्रों और पूर्व अधिकारियों का मानना है कि अगर सत्ता परिवर्तन में IRGC की भूमिका इसी तरह मजबूत रही, तो भविष्य में ईरान की राजनीति पर सेना का प्रभाव और बढ़ सकता है।

दो सूत्रों ने चेतावनी दी कि अगर IRGC का दबदबा लगातार बढ़ता रहा, तो ईरान की इस्लामी व्यवस्था धीरे-धीरे एक तरह के सैन्य शासन में बदल सकती है, जहां धार्मिक वैधता केवल औपचारिक रूप में रह जाएगी। उनका कहना है कि ऐसा होने पर जनता का समर्थन कम हो सकता है और सरकार के लिए देश के अंदर और बाहर बढ़ती चुनौतियों से निपटना और कठिन हो जाएगा।

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