Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल सकता है। हालांकि, पहले की तरह यहां सामान्य कामकाज बहाल नहीं होगा। इसके बजाय, ईरान दुनिया के सबसे अहम तेल रूट्स के कामकाज के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा। अब ईरान यह तय करेगा कि कौन जहाज वहां से गुजरेगा और कौन नहीं...। ईरान ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से दो सप्ताह तक सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर ऐलान बाद यह फैसला लिया गया है।
हालांकि, इस सीजफायर को अस्थायी मानी जा रही है। न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत जहाज एक सीमित समय के लिए स्ट्रेट से गुजर सकते हैं। लेकिन ऐसा वे सिर्फ ईरान की सेना के साथ तालमेल बिठाकर ही कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें ईरान और ओमान दोनों को टोल भी देना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अगले 2 हफ्तों कर इस शर्त के साथ खोलने की इजाजत दी है कि वो इस दौरान इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा। इससे ईरान के साथ साथ ओमान को भी फायदा होगा। उसे भी टोल का कुछ हिस्सा मिलेगा।
AP की रिपोर्ट के मुताबिक दो हफ्ते के सीजफायर प्लान के तहत ईरान और ओमान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल ले सकते हैं। ये भी तय हो गया है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध के बाद अपने देश के पुनर्निर्माण में करेगा। जबकि ओमान इस पैसा का क्या करेगा, यह अभी साफ नहीं है।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दो सप्ताह की सीजफायर प्लान में ईरान और ओमान दोनों को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की अनुमति देना शामिल है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस वक्त ईरान जिन जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दे रहा है उनसे प्रति जहाज 20 लाख अमेरिकी डॉलर टोल वसूल रहा है। हालांकि कितने और किन देशों के जहाजों से ये टोल वसूला गया है इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जहाजों को ईरान के सशस्त्र बलों के साथ तालमेल के जरिए गुजरने की अनुमति दी जाएगी। AP की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की 10-सूत्रीय योजना में साफ तौर पर ईरानी सशस्त्र बलों के साथ तालमेल के बाद ही होर्मुज से जहाजों को गुजरने की बात कही गई है। इसे तेहरान के लिए एक रणनीतिक लाभ के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान ने तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है।
शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। ताकि सभी विवादों का समाधान निकाला जा सके।प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद वार्ता” क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने में मददगार साबित होगी।
यह घटनाक्रम 28 फरवरी से जारी संघर्ष को खत्म को कम करने के पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयासों के बाद आया है। यह संघर्ष उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सभ्यता को मिटा देने की चेतावनी दी थी।