'मिडिल ईस्ट से बाहर भी मारेंगे'- ट्रंप के दोबारा हमले की धमकी पर ईरान की खुली वार्निंग!

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे अगले कुछ दिनों में ईरान पर एक बार फिर बड़े हवाई हमले करने का आदेश दे सकते हैं। ट्रंप का मकसद ईरान को घुटनों पर लाना है ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को व्यापार के लिए दोबारा खोल दे

अपडेटेड May 20, 2026 पर 6:36 PM
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'मिडिल ईस्ट से बाहर भी मारेंगे' ट्रंप के दोबारा हमले की वार्निंग पर ईरान की खुली धमकी!

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा हमले की धमकी दिए जाने के बाद, ईरान की सेना ने साफ कह दिया है कि अगर इस बार उन पर हमला हुआ, तो युद्ध सिर्फ मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में फैल जाएगा।

दोनों देशों के बीच अप्रैल में जो अस्थाई युद्धविराम (Ceasefire) हुआ था, उसे एक स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं, क्योंकि कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?


राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे अगले कुछ दिनों में ईरान पर एक बार फिर बड़े हवाई हमले करने का आदेश दे सकते हैं। ट्रंप का मकसद ईरान को घुटनों पर लाना है ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को व्यापार के लिए दोबारा खोल दे।

जब ट्रंप से पूछा गया कि वे हमले के लिए कितना इंतजार करेंगे, तो उन्होंने कहा, "शायद दो-तीन दिन, शुक्रवार, शनिवार या रविवार तक। या फिर अगले हफ्ते की शुरुआत में हम ईरान पर एक और बड़ा हमला कर सकते हैं।"

ईरान की सेना (IRGC) का करारा जवाब

ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद ईरान की सबसे ताकतवर सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने बुधवार को कड़ी चेतावनी जारी की।

उन्होंने कहा, "अगर ईरान के खिलाफ दोबारा गुस्ताखी की गई, तो इस बार क्षेत्रीय युद्ध की सीमाएं टूट जाएंगी और जंग मिडिल ईस्ट के बाहर तक फैल जाएगी। हम उन जगहों पर तबाही मचाएंगे, जिसकी अमेरिका ने कल्पना भी नहीं की होगी।"

बता दें कि फरवरी में जब युद्ध शुरू हुआ था, तब ईरान ने न सिर्फ इजरायल बल्कि तुर्की, साइप्रस और खाड़ी देशों पर भी ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं। भले ही अप्रैल के समझौते तक ईरान की सेना को नुकसान पहुंचा था, लेकिन उसके पास अब भी दूसरे देशों पर हमला करने की पूरी ताकत है।

विवाद की 2 सबसे बड़ी वजहें

न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि वह सिर्फ बिजली बनाने के लिए यूरेनियम तैयार कर रहा है। ईरान ने ट्रंप की इस मांग को साफ ठुकरा दिया है कि वह अपना यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे।

समुद्री नाकेबंदी: ईरान ने दुनिया के सबसे जरूरी व्यापारिक समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़' को बंद कर रखा है, जिससे तेल के टैंकर नहीं गुजर पा रहे हैं। ईरान की शर्त है कि पहले अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए, तभी वह इस रास्ते को खोलेगा।

दुनिया पर असर: महंगाई और तेल का संकट

इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इस साल तेल की कीमतों में 80% तक की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। तेल महंगा होने की वजह से दुनिया भर के बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है और एक्सपर्ट्स को डर है कि इससे पूरी दुनिया में भयंकर महंगाई फैल सकती है।

क्या शांति की कोई उम्मीद है?

इस बीच, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सुलह कराने की कोशिशों में जुटा है। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी एक हफ्ते में दूसरी बार तेहरान (ईरान की राजधानी) पहुंचे हैं।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने थोड़ा सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा, "हमें लगता है कि बातचीत में काफी प्रोग्रेस हुई है और ईरानी भी समझौता चाहते हैं। दोबारा युद्ध शुरू करना हमारा आखिरी रास्ता (Option B) है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप या ईरान, दोनों में से कोई भी दोबारा जंग नहीं चाहता।"

सोमवार को ट्रंप ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अरब सहयोगियों (सऊदी अरब, कतर और UAE) के कहने पर ईरान पर नए हमले फिलहाल रोक रखे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि दोनों देशों की जिद को देखते हुए युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है।

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