Iran-Israel War: इजरायल से तनाव के बीच ईरान का बड़ा ऐलान, परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने की तैयारी

Iran-Israel War: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघई ने सोमवार को बताया कि देश की संसद एक ऐसा कानून बनाने पर काम कर रही है जिससे ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकल सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब भी परमाणु हथियारों को बनाने के खिलाफ है और उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है

अपडेटेड Jun 16, 2025 पर 2:48 PM
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Israel-Lebanon: परमाणु अप्रसार संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।

Iran-Israel War:  ईरान और इजराइल के बीच लड़ाई बीते चार दिनों से जारी है। दोनों ही देश एक दूसरे पर हमले तेज करते जा रहे हैं। ईरान ने सोमवार सुबह इजराइल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। ईरानी सेना ने सेंट्रल इजराइल में कई जगहों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इससे पहले 13 जून को इजराइल ने ईरान पर किए गए हवाई हमलों में परमाणु केंद्रों पर जमकर मिसाइलें और बम बरसाए। वहीं इन हमलों के बीच ईरान ने सोमवार को परमाणु अप्रसार संधि को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है।

 परमाणु अप्रसार संधि पर ईरान का बड़ा ऐलान

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघई ने सोमवार को बताया कि देश की संसद एक ऐसा कानून बनाने पर काम कर रही है जिससे ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकल सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब भी परमाणु हथियारों को बनाने के खिलाफ है और उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है।


परमाणु अप्रसार संधि, जिसे एनपीटी कहा जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका मकसद दुनिया में परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना, परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल बढ़ावा देना और परमाणु हथियारों को धीरे-धीरे खत्म करना है। यह संधि 1968 में तैयार हुई थी और 1970 से लागू हुई।

ईरान ने तेज किया यूरेनियम एनरिचमेंट

इस हमले के बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और कई दूसरे देशों का मानना है कि फिलहाल ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से सीधे हथियार नहीं बना रहा है। लेकिन ईरान ने यूरेनियम एनरिचमेंट तेज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय जांच टीमों को भी पूरी तरह जांच करने नहीं दे रहा। इसी वजह से इज़रायल को शक हुआ और उसने बड़ी कार्रवाई कर दी।

ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम साल 1957 में अमेरिका की मदद से शुरू किया था। उस समय इसका मकसद सिर्फ ऊर्जा पैदा करना था, क्योंकि तब ईरान में शाह की सरकार थी। लेकिन 1979 में जब इस्लामिक क्रांति हुई, तो अमेरिका ने अपना सहयोग वापस ले लिया। इसके बाद से ही ईरान के इरादों पर सवाल उठने लगे। हालांकि ईरान ने  परमाणु अप्रसार संधि  (NPT) पर साइन किया है, जिसमें उसने वादा किया था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। फिर भी जब ईरान ने यूरेनियम को बहुत ज्यादा मात्रा में यूरेनियम एनरिचमेंट करना शुरू किया, तो दुनिया को चिंता होने लगी कि वह परमाणु बम बना सकता है।

क्या होता यूरेनियम एनरिचमेंट?

बता दें कि यूरेनियम एनरिचमेंट एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें यूरेनियम में मौजूद खास किस्म के कण यूरेनियम-235 की मात्रा बढ़ाई जाती है। अगर इसका इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाए तो 3 से 5 प्रतिशत तक संवर्धन काफी होता है, लेकिन अगर किसी देश को परमाणु बम बनाना हो, तो इसके लिए 90% संवर्धन यानी एनरिचमेंट जरूरी होता है। ईरान के पास ऐसी आधुनिक मशीनें हैं जो इस काम को बहुत तेज़ी से कर सकती हैं। हालांकि ईरान का कहना है कि वह यह सब सिर्फ ऊर्जा बनाने के लिए कर रहा है, लेकिन जब उसने अंतरराष्ट्रीय जांचों में सहयोग देना बंद किया और यूरेनियम का संवर्धन बढ़ा दिया, तो दुनिया को शक होने लगा कि वह किसी और मकसद से काम कर रहा है।

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