ईरान इस समय हाल के सालों के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। सरकार विरोधी प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैल गए हैं। इस आंदोलन के दौरान इस्फहान शहर में आंदोलनकारियों ने सरकारी मीडिया संस्था इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) की एक इमारत में आग लगा दी। वहीं, दक्षिणी ईरान के अहम बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में भी भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रदर्शनों के बढ़ते असर को देखते हुए सरकार ने देशभर में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार को प्रदर्शन की गति, फैलाव और संगठन क्षमता से गंभीर चिंता है।
ये प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए थे। बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और खराब आर्थिक स्थिति से परेशान लोगों ने शुरू में आर्थिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। लेकिन धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप ले चुका है। अब लोग खुलकर सत्ता परिवर्तन और इस्लामिक रिपब्लिक व्यवस्था खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
देश के 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें अलग-अलग क्षेत्रों, जातीय समूहों और वर्गों के लोग शामिल हैं। पहले जहां नारे महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्रित थे, अब उनमें सरकार की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने इस आंदोलन को रोकने के लिए सख्ती अपनाई है। पुलिस और सुरक्षा बल टीयर गैस, गोलियां तक चले रहे हैं और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक कम से कम 36 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जबकि 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इंटरनेट बंद होने की वजह से प्रदर्शनकारियों के लिए आपस में संपर्क रखना और बाहर की दुनिया को जानकारी देना मुश्किल हो गया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह सरकार की एक आम रणनीति बन चुकी है, खासकर जब विरोध तेज़ होता है।
सरकार ने स्थिति को शांत करने के लिए कुछ आर्थिक राहत जैसे सब्सिडी देने की घोषणा की है। साथ ही, उसने प्रदर्शनकारियों पर अमेरिका और इसराइल जैसे विदेशी देशों के साथ साज़िश करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह घरेलू है और यह आर्थिक बदहाली, राजनीतिक दमन और वर्षों से अनसुनी मांगों के खिलाफ है।
कड़े सरकारी रुख के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं, और अब आम हड़ताल की मांग भी उठने लगी है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।