Iran-Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं के बीच एक नया मोड़ आ गया है। ईरान ने अब पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों और सांसदों का मानना है कि पाकिस्तान इस संवेदनशील कूटनीति के लिए एक 'निष्पक्ष मध्यस्थ' नहीं है, क्योंकि उसका झुकाव अमेरिका की ओर ज्यादा है। आसान शब्दों में कहे तो ईरान ने पाकिस्तान को अमेरिका का दलाल बताया है और कहा है कि एक 'फेयर डील' कराना उसके बस का नहीं है।
'अमेरिका के आगे नतमस्तक है पाकिस्तान'
ईरान की संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने पाकिस्तान की भूमिका की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी और दोस्त है, लेकिन उसमें मध्यस्थता के लिए जरूरी विश्वसनीयता की कमी है। ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान हमेशा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और वाशिंगटन के रुख का विरोध करने से बचता है।
वादा खिलाफी पर पाकिस्तान की 'चुप्पी'
इब्राहिम रजाई ने दावा किया कि अमेरिका कई बार अपने वादों से पीछे हटा है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी इस पर आवाज नहीं उठाई। रजाई के मुताबिक, अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के प्रस्तावों को स्वीकार किया और बाद में पलट गया। लेबनान और फ्रीज की गई संपत्तियों के मुद्दे पर भी अमेरिका ने अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं की, जिस पर इस्लामाबाद ने चुप्पी साधे रखी।
इस्लामाबाद वार्ता को बताया 'रणनीतिक भूल'
हाल ही में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में एक हाई-प्रोफाइल बैठक की मेजबानी की थी, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हुए थे। यह बातचीत होमुर्ज की घेराबंदी और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर असहमति के कारण बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। ईरानी सांसद महमूद नबवियां ने इस बैठक को पाकिस्तान में आयोजित करने को एक 'रणनीतिक चूक' करार दिया है।
'पाक कर रहा ईरान को नुकसान पहुंचाने की साजिश'
ईरानी सांसदों का मानना है कि पाकिस्तान में वार्ता आयोजित करने से अमेरिका को ईरान पर दबाव बनाने का मौका मिल गया। अमेरिका ने इस बैठक का फायदा उठाकर ईरान से समृद्ध यूरेनियम के उत्पादन को सीमित करने जैसी बड़ी मांगें रख दीं, जिसे तेहरान 'अस्वीकार्य' मानता है। अब ईरान के भीतर यह मांग उठ रही है कि भविष्य की बातचीत किसी ऐसे स्थान पर होनी चाहिए जो पूरी तरह से तटस्थ हो।
ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक अमेरिका होमुर्ज जलडमरूमध्य से अपना ब्लॉक हटाकर समुद्री रास्ते नहीं खोलता, तब तक परमाणु मुद्दों पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। पाकिस्तान द्वारा इस जटिल स्थिति को ठीक से मैनेज न कर पाने के कारण ईरान अब ओमान या कतर जैसे अन्य मध्यस्थों की ओर देख सकता है।