परमाणु हथियार, अरबों डॉलर की डिमांड और होर्मुज में जंग! जानें क्यों ट्रंप की 'डील' ठुकरा रहे राष्ट्रपति पेजेशकियान

Iran US Talks: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, वाशिंगटन युद्धविराम के समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और ईरान पर समुद्री प्रतिबंध लगाकर 'दबाव की राजनीति' कर रहा है

अपडेटेड Apr 26, 2026 पर 2:04 PM
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अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा झगड़ा परमाणु कार्यक्रम को लेकर है

Iran-US Relations Update: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत एक बार फिर अधर में लटक गई है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी तरह के दबाव, धमकी या घेराबंदी के साये में बातचीत की मेज पर नहीं आएगा। ट्रंप प्रशासन की ओर से रखी गई कड़ी शर्तों और ईरान की अरबों डॉलर की मुआवजे की मांग ने सुलह की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है।

'दबाव में नहीं होगी बात': पेजेशकियान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, वाशिंगटन युद्धविराम के समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और ईरान पर समुद्री प्रतिबंध लगाकर 'दबाव की राजनीति' कर रहा है। ईरान का मानना है कि अमेरिका की धमकियां और पाबंदियां संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के खिलाफ हैं, जिससे बातचीत की नीयत पर शक पैदा होता है।


यूरेनियम के भंडार पर फंसा पेंच

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा झगड़ा परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपनी सभी परमाणु गतिविधियां स्थायी रूप से बंद करे और अपना 400 किलो समृद्ध यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंप दे। तेहरान ने यूरेनियम सौंपने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की पाबंदी केवल अस्थायी होनी चाहिए।

'होर्मुज जलडमरूमध्य' बना है युद्ध का मैदान

समुद्री रास्तों पर वर्चस्व की लड़ाई अब चरम पर है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों से प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक वह 'स्ट्रेस ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग पर पाबंदी जारी रखेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कहा है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक ईरान की घेराबंदी जारी रहेगी।

270 अरब डॉलर का हर्जाना और फ्रीज हुई संपत्ति की डिमांड

ईरान केवल प्रतिबंध हटाना ही नहीं चाहता, बल्कि उसकी मांगें काफी बड़ी हैं। ईरान अपने 20 अरब डॉलर की फ्रीज हुई संपत्ति को तुरंत रिलीज करने की मांग कर रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के बदले 270 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है।

एक तरफ तनाव है, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी सक्रिय हैं। उन्होंने हाल ही में मिस्र, तुर्की और अन्य क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर युद्धविराम और कूटनीति के रास्तों पर चर्चा की है।

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