ईरान ने ठुकराया अमेरिका का सीजफायर प्रस्ताव, 10 पॉइंट में रखी जंग खत्म करने की शर्तें
ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराते हुए 10 शर्तों का प्लान सामने रखा है। अस्थायी युद्धविराम से इनकार के बीच तनाव और बढ़ गया है। जानिए अब क्या बातचीत से हल निकलेगा या टकराव और गहरा होगा?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि दबाव या धमकी के बीच बातचीत नहीं हो सकती।
ईरान ने अमेरिका के उस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे दी है, जिसमें मौजूदा संघर्ष को खत्म करने की बात कही गई थी। सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरान ने अस्थायी सीजफायर को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। उसने स्थायी रूप से संघर्ष खत्म करने की मांग की है।
यह जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा गया है, जो इस समय कूटनीतिक बातचीत में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
ट्रंप का मिलाजुला बयान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ ईरान की सैन्य ताकत की तारीफ की, तो दूसरी तरफ सीजफायर की डेडलाइन को लेकर सख्त रुख दिखाया। उन्होंने मंगलवार की डेडलाइन को 'फाइनल' बताया।
व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी 'काफी मजबूत और सक्षम लड़ाके' हैं, लेकिन अब उनकी ताकत पहले जैसी नहीं रही है।
ईरान का 10 पॉइंट प्लान क्या है
ईरान ने अपने जवाब में 10 बिंदुओं का एक फ्रेमवर्क दिया है, जिसमें उसने संघर्ष खत्म करने की शर्तें रखी हैं। IRNA के मुताबिक, इसमें शामिल हैं:
पूरे क्षेत्र में संघर्ष का अंत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही की गारंटी
अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों को हटाना
दोबारा निर्माण की जिम्मेदारी तय करना
ईरान का कहना है कि वह अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी समझौता चाहता है।
धमकी के माहौल में बातचीत नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि दबाव या धमकी के बीच बातचीत नहीं हो सकती। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अपनी शर्तें पहले ही मध्यस्थों के जरिए बता चुका है। उन्होंने अमेरिका के पहले के प्रस्तावों 'जरूरत से ज्यादा' बताते हुए खारिज कर दिया। जैसे कि 15 पॉइंट प्लान।
बघाई का कहना है कि ईरान अपनी मांगों को साफ तौर पर रख रहा है और इसे किसी तरह का समझौता नहीं माना जाना चाहिए।
सीजफायर पर अभी सहमति नहीं
व्हाइट हाउस ने कहा है कि 45 दिन के सीजफायर प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कई विकल्पों में से एक है और फिलहाल 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' जारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों के जरिए बातचीत चल रही है। साथ ही अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच भी अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। सूत्रों का कहना है कि अगले 48 घंटे में किसी ठोस समझौते की संभावना कम है।
अस्थायी समझौते पर ईरान की चिंता
ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह गाजा या लेबनान जैसे अस्थायी सीजफायर मॉडल से सहमत नहीं है, क्योंकि ऐसे समझौते बार-बार टूटते हैं। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अस्थायी युद्धविराम से विरोधी पक्ष को दोबारा ताकत जुटाने का मौका मिल जाता है।
होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव
वीकेंड में ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर इसे नहीं खोला गया, तो अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, एक तरफ बातचीत जारी है, लेकिन दूसरी तरफ बयानबाजी और तनाव दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।