Iran Attack On US Navy: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक और भयावह खबर आई है। 'तेहरान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बहरीन के मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस हमले में 21 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और Shahed-136 'कामिकेज' ड्रोन्स का इस्तेमाल किया।
सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो में बेस से काला धुआं उठता देखा गया है। बताया जा रहा है कि बेस के रडार सिस्टम, संचार टर्मिनल और कई सर्विस बिल्डिंग्स को भारी नुकसान पहुंचा है। जहां ईरान 21 मौतों का दावा कर रहा है, वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले के दौरान कर्मी बंकरों में थे। हालांकि, उन्होंने क्षेत्र में अन्य झड़पों में कुछ अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है, लेकिन बहरीन बेस पर सटीक मौतों का आधिकारिक आंकड़ा अभी आना बाकी है।
ईरान ने लिया ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का बदला
ईरान ने इन हमलों को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का 'सटीक जवाब' बताया है। इस ऑपरेशन के तहत कथित तौर पर ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। बहरीन बेस की सुरक्षा के लिए तैनात पैट्रियट (Patriot PAC-3) एयर डिफेंस सिस्टम के बावजूद ईरानी मिसाइलों का बेस तक पहुंचाना सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
क्या है '5वां बेड़ा' और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों की सुरक्षा करता है। यह फारस की खाड़ी, लाल सागर और अरब सागर सहित 25 लाख वर्ग मील के समुद्री क्षेत्र की निगरानी करता है। इसका मुख्य काम होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखना है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। मनामा स्थित इस बेस पर आमतौर पर लगभग 8,300 सैनिक तैनात रहते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना युद्ध का मुख्य केंद्र
होर्मुज का रास्ता बंद होने से दुनिया भर में तेल का संकट गहरा गया है। 2 मार्च को ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस रास्ते को बंद कर दिया और धमकी दी कि जो भी जहाज यहां से गुजरेगा उसे जला दिया जाएगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना अब तेल टैंकरों को अपनी सुरक्षा में ले जाएगी, जिससे समुद्र में सीधी जंग का खतरा और बढ़ गया है।