Strait of Hormuz Crisis: फरवरी में शुरू हुए ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पहली बार ईरान ने समंदर में बड़ी कार्रवाई की है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज की खाड़ी से गुजर रहे दो कंटेनर जहाजों को फायरिंग के बाद जब्त कर लिया है। इस घटना के बाद वैश्विक तेल बाजार में भूचाल आ गया है और कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब ईरान ने जहाजों को रोकने के लिए हथियारों का इस्तेमाल किया है। ईरानी सेना ने कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया। इनमें से दो को कब्जे में ले लिया गया है, जबकि एक फायरिंग के बावजूद आगे निकलने में सफल रहा। ईरान की समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने बताया कि IRGC ने साफ कर दिया है कि खाड़ी में 'व्यवस्था और सुरक्षा' में किसी भी तरह का हस्तक्षेप ईरान के लिए 'रेड लाइन' है।
किन जहाजों को बनाया गया निशाना?
MSC Francesca: पनामा के झंडे वाले इस जहाज को जब्त कर लिया गया है। मोंटेनेग्रो सरकार ने पुष्टि की है कि जहाज पर मौजूद उनके 4 क्रू मेंबर सुरक्षित हैं।
Epaminondas: लाइबेरिया के झंडे वाले इस ग्रीक जहाज पर रॉकेट और गोलियों से हमला किया गया, जिससे इसके कंट्रोल रूम को भारी नुकसान पहुंचा है। यह जहाज अब ईरानी सेना के कब्जे में है।
Euphoria: इस तीसरे जहाज पर भी फायरिंग हुई, लेकिन यह सुरक्षित रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचने में कामयाब रहा।
ट्रंप की 'घेराबंदी' और ईरान का 'पलटवार'
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को बमबारी से ज्यादा 'आर्थिक घेराबंदी' का डर है। ईरान की ताजा कार्रवाई को ट्रंप की उसी रणनीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। ईरान यह संदेश देना चाहता है कि अगर उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह दुनिया की 'एनर्जी सप्लाई' को भी नहीं चलने देगा।
एक तरफ अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी कर रखी है, दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते बंद हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीजफायर पर ठोस समझौता नहीं होता, समंदर में यह 'लुका-छिपी' और हिंसा जारी रहेगी।