US Intercepts 3 Iranian Tankers: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एशियाई देशों के समुद्री तटों तक पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने भारत, मलेशिया और श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के तीन बड़े तेल टैंकरों को इंटरसेप्ट किया है और उन्हें उनके रास्तों से डायवर्ट कर दिया है। अमेरिका की इस कार्रवाई ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। इससे पहले ईरान ने भारत आ रहे एक टैंकर पर गोलीबारी करके उसे कब्जे में ले लिया था।
भारत और मलेशिया के तट के पास अमेरिका की घेराबंदी
रॉयटर्स और समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने उन जहाजों को निशाना बनाया है जो अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। सुपरटैंकर Dorena 20 लाख बैरल कच्चे तेल से लदा हुआ था। इसे तीन दिन पहले दक्षिण भारत के तट के पास देखा गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि इसे अमेरिकी नौसेना का एक विध्वंसक एस्कॉर्ट कर रहा है। वहीं Deep Sea सुपरटैंकर मलेशियाई तट के पास देखा गया था, जिसे अब अमेरिका ने डायवर्ट कर दिया है। 10 लाख बैरल की क्षमता वाला टैंकर Sevin भी मलेशिया के पास पकड़ा गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जानबूझकर 'होर्मुज की खाड़ी' से दूर खुले समंदर में ईरानी जहाजों को रोक रहा है। इसका मुख्य कारण खाड़ी में ईरान द्वारा बिछाई गई 'समुद्री सुरंगें' हैं, जिनसे अमेरिकी जहाजों को खतरा हो सकता है।
भारत आ रहे 'Derya' टैंकर पर भी सस्पेंस
शिपिंग सूत्रों के मुताबिक, एक और ईरानी टैंकर 'Derya' को भी अमेरिका ने अपने कब्जे में लिया होगा। यह जहाज भारत को तेल की सप्लाई करने वाला था, लेकिन रविवार को भारत के लिए 'अमेरिकी छूट' समाप्त होने के कारण यह अपना माल नहीं उतार सका। इसे आखिरी बार शुक्रवार को भारत के पश्चिमी तट के पास देखा गया था।
अब तक 29 जहाजों को वापस भेजा गया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 'X' पर जानकारी दी है कि जब से ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी शुरू हुई है, तब से अमेरिकी सेना ने 29 जहाजों को या तो वापस मोड़ दिया है या उन्हें बंदरगाहों पर लौटने के लिए मजबूर किया है। अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को पूरी तरह तोड़ना है।
होर्मुज की खाड़ी में ईरान का पलटवार
अमेरिका की इस सख्ती के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान ने बुधवार को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर फायरिंग की और दो कंटेनर जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। इस रास्ते से दुनिया का एक-पांचवां तेल और गैस गुजरता है। इसके बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ रही है।