ईरान के सुप्रीम लीडर के इंडिया में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के सिद्धांत में परमाणु हथियार के लिए कोई जगह नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि ईरान युद्ध तुरंत खत्म करने के लिए तैयार है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। इस लड़ाई को शुरू हुए करीब एक महीना हो चुका है।
इलाही के सुप्रीम लीडर से करीबी संबंध
इलाही के अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ करीबी रिश्ते थे। उनके बेटे और ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के साथ भी उनके करीब रिश्ते हैं। उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया है, "हमारे सुप्रीम लीडर ने एक फतवा जारी किया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार की मनाही है, यह हराम है। हम इसे नहीं बनाना चाहते। इम इसकी कोशिश नहीं कर रहे।"
मध्यस्थता के पाकिस्ता के दावे को खारिज किया
उनके मुताबिक, मध्यपूर्व की लड़ाई का हल उन देशों पर निर्भर करता है, जिन्होंने इसे शुरू किया था। उन्होंने पाकिस्तान के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि वह इस लड़ाई के खात्मे के लिए ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है।
लड़ाई खत्म करने में भारत बड़ा रोल निभा सकता है
इलाही ने कहा, "पाकिस्तान में हमारे राजदूत ने भी इसका खंडन किया है। हमने पाकिस्तान के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं की है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई को खत्म करने में भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। इससे पहले पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर एवं फॉरेन मिनिस्टर इशाक डार ने कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच 15 प्वाइंट्स वाली शांति पहल में पाकिस्तान बड़ी भूमिका निभा रहा है।
लड़ाई शुरू करने वाले देश इसे खत्म नहीं करना चाहते
इलाही ने कहा कि इस लड़ाई का हल उन देशों पर निर्भर करता है, जिन्होंने इसे शुरू किया। उनकी इस लड़ाई को खत्म करने में दिलचस्पी नहीं दिखती। उनकी दिलचस्पी हथियारों की बिक्री और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों में है। उन्हें इस बात से कोई असर नहीं पड़ता कि इस लड़ाई के चलते गरीब लोगों और कमजोरे देशों की दिक्कत बढ़ रही है।
भारत-ईरान की दोस्ती 5000 साल पुरानी
ईरान-भारत के संबंधों के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती 5000 सालों से चली आ रही है। भारत और ईरान संस्कृति, सोच और दर्शन के मामले में एक-दूसरे से करीबी रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत न्याय, आजादी और उदारता की भूमि है।