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सीजफायर होने बाद भी ईरान युद्ध का असली आर्थिक दर्द अभी है बाकी, क्या बड़े मंदी की ओर है दुनिया? जानिए

Global Economy: एशियाई देशों में पहले ही ऊर्जा की बचत के उपाय शुरू हो गए हैं। लेकिन संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। होर्मुज के रास्ते से एल्युमीनियम, हीलियम और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई होती है। इनके रुकने से प्लास्टिक, कार के पुर्जे, कॉस्मेटिक्स और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स महंगे होने तय हैं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 08, 2026 पर 1:51 PM
सीजफायर होने बाद भी ईरान युद्ध का असली आर्थिक दर्द अभी है बाकी, क्या बड़े मंदी की ओर है दुनिया? जानिए
अमेरिका में इस युद्ध का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर दिखने लगा है

War Real Economic Pain: भले ही अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर ने फिलहाल राहत दी हो, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस युद्ध का असली आर्थिक प्रभाव अभी सामने आना बाकी है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इसकी शुरुआती आहट एमेजॅान के फ्यूल सरचार्ज और बढ़ती होम लोन दरों के रूप में दिखने लगी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि महंगाई अब कोई चिंता की बात नहीं है, लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई दर 4% तक पहुंच सकती है। अमेरिका फिलहाल अपनी भौगोलिक दूरी के कारण बचा हुआ है, लेकिन यह 'बफर' हमेशा के लिए नहीं है।

आम आदमी की जेब पर सीधा प्रहार

अमेरिका में इस युद्ध का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर दिखने लगा है। एमेजॅान ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण डिलीवरी पर 'फ्यूल सरचार्ज' लगा दिया है। होम लोन की दरें पिछले सात महीनों के उच्चतम स्तर 6.5% के करीब पहुंच गई हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें $4 प्रति गैलन के पार निकल गई हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है।

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