धमकियों के बावजूद ईरान पर हमला क्यों नहीं कर सकता अमेरिका? वजह जान कर रह जाएंगे हैरान!

US Threat Iran: बार-बार दी गई धमकियों और चेतावनियों ने वाशिंगटन में एक पुराने सवाल को फिर से उठा दिया है - ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप असल में कैसा होगा? खासकर इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस इलाके में अमेरिका ने जब भी हस्तक्षेप की कोशिश की, वो कभी सफल नहीं हुई। आइए आज ऐसे ही कुछ अहम सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं

अपडेटेड Jan 14, 2026 पर 9:08 PM
Story continues below Advertisement
धमकियों के बावजूद ईरान पर क्यों हमला नहीं कर सकता है अमेरिका?

वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के बाद, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अगला निशाना ईरान है। ट्रंप लगातार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करना इतना आसान होगा? इस्लामी गणराज्य के धार्मिक नेताओं को सालों में सबसे बड़े असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार दी गई धमकियों और चेतावनियों ने वाशिंगटन में एक पुराने सवाल को फिर से उठा दिया है - ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप असल में कैसा होगा? खासकर इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस इलाके में अमेरिका ने जब भी हस्तक्षेप की कोशिश की, वो कभी सफल नहीं हुई। आइए आज ऐसे ही कुछ अहम सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

केवल धमकियां, तैयारी नहीं

भले ही ट्रंप ईरान के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका ने इलाके में अभी तक अपनी सेना या विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) तैनात नहीं किए हैं। इसके उलट, पिछले कुछ महीनों में वहां अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम हुई है।


हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने सभी को और भी चौंका दिया, जिसमें दावा किया गया कि ईरान की धमकी के बाद अमेरिका मिडिल ईस्ट में तैनात अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है।

AFP की एक रिपोर्ट के अनुसार, कतर में अमेरिका के अल उदैद मिलिट्री बेस पर तैनात कुछ सैनिकों को बेस छोड़ने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अमेरिकी कर्मियों को बुधवार शाम तक कतर में मिलिट्री बेस को छोड़ने के लिए कहा गया था। कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है।

पड़ोसियों का डर

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अमेरिका के दोस्त देश भी इस समय ईरान पर हमले के पक्ष में नहीं हैं। पिछले साल इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिनों के युद्ध में ईरान ने जो हवाई हमले किए थे, उससे खाड़ी देश अभी तक डरे हुए हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए हो और बाद में ईरान उन पर पलटवार करे।

क्योंकि ईरान साफ शब्दों में कह चुका है कि अगर अमेरिका ने तेहरान पर हमला किया, तो उसके पड़ोसी देश, जो अमेरिकी सेना को अपनी जमीन पर पनाह देते हैं, वो उन पर पूरी ताकत के साथ पलटवार करेगा।

लॉजिस्टिक समस्या: हथियार और ठिकाने

अमेरिका के पास फिलहाल मिडिल ईस्ट में कोई बड़ा युद्धपोत मौजूद नहीं है। अगर उसे हमला करना है, तो उसे कतर, बहरीन या सऊदी अरब जैसे देशों से उनके सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की इजाजत लेनी होगी। अगर ये देश मना कर देते हैं, तो अमेरिका के लिए हमला करना मुश्किल हो जाएगा।

ईरान की ताकत अभी खत्म नहीं हुई

इजरायल के साथ युद्ध में ईरान को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन उसके पास अब भी लगभग 2,000 भारी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। ये मिसाइलें पहाड़ों के नीचे छिपी हैं और एक साथ दागी जाने पर अमेरिका या इजरायल के डिफेंस सिस्टम को भी आसानी से चकमा दे सकती हैं।

हमले का उल्टा असर होने का डर

जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर बम गिराता है, तो ईरान की जनता, जो फिलहाल अपनी सरकार का विरोध कर रही है, वो देश के समर्थन में एक साथ खड़ी हो सकती है। लोग विदेशी हमले के खिलाफ अपनी सरकार का साथ देने लगेंगे, जिससे ईरान के शासक और मजबूत हो जाएंगे।

बड़ा सवाल- क्या सीधे ईरान के 'सुप्रीम लीडर' पर हमला होगा?

अमेरिका ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने की सोच सकता है, लेकिन किसी देश के शीर्ष नेता को मारना कानूनी रूप से बहुत पेचीदा है। साथ ही, इससे सरकार नहीं बदलेगी, क्योंकि खामेनेई ने पहले ही अपनी जगह लेने के लिए तीन बड़े धर्मगुरुओं को तैयार कर रखा है।

इन सब बातों से यही कहा जा सकता है कि ईरान में भले ही इस समय सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हों, लेकिन वहां की सरकार और सेना अभी भी काफी एकजुट है। ट्रंप के लिए ईरान पर हमला करना एक ऐसा जोखिम हो सकता है, जिसके नतीजे भुगतना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा।

US Iran Tension: ईरान की धमकी से घबरा गया अमेरिका, मिडिल ईस्ट से सैनिकों को वापस बुलाने का दिया आदेश!

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।