Iran-US War Impact: खाड़ी देशों में कई अहम गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों ने वैश्विक एनर्जी मार्केट को हिला दिया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के चलते खाड़ी देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े पैमाने पर खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते भारत समेत दुनिया के मार्केट को झटका लगा है। तेल की कीमतें उबाल मारने लगीं और प्रति बैरल $115 के करीब पहुंच गया। एलएनजी मार्केट में टाइट सप्लाई और कार्गो के रास्ते में बदलाव की आशंका के चलते हुए भाव पर असर पड़ सकता है। इन सबको मिलाकर वैश्विक एनर्जी सिस्टम के एक बड़े हिस्से पर असर पड़ रहा है।
कहां-कहां हुए हमले से मची हलचल
एक दिन पहले की शाम को दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस फील्ड साउथ पार्स-नॉर्थ डोम (South Pars–North Dome) गैस फील्ड पर हमला हुआ। इस फील्ड में करीब में करीब 48 लाख करोड़ क्यूबिक मीटर गैस का अनुमानित भंडार है, जो दुनिया भर में अब तक मिले रिजर्व का करीब 25% है। यह ईरान और कतर दोनों के गैस उत्पादन की रीढ़ है और दुनिया भर में एलएनजी की सप्लाई में बड़ी भूमिका है।
इसके अलावा रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी (Ras Laffan Industrial City) पर भी हमला हुआ जो कतर का मुख्य एलएनजी एक्सपोर्ट हब है। रास लफान से सालाना 7.7-8 करोड़ टन एलएनजी का निर्यात होता है जोकि वैश्विक एलएनजी ट्रेड का करीब 20% है और अधिकतर यह एशिया और यूरोप भेजा जाता है। यहां किसी दिक्कत से दुनिया भर में गैस की उपलब्धता पर सीधा असर दिखता है।
यूएई में भी गैस कारोबार को झटका लगा है। हबशन गैस प्रोसेसिंग प्लांट (Habshan Gas Processing Plant) में काम बंद हो चुका है। यह यूएई के गैस नेटवर्क में अहम प्रोसेसिंग हब है, जो हर दिन अरबों क्यूबिक फीट हैंडल करता है।
कितना असर पड़ने की है आशंका?
खाड़ी देशों का एनर्जी इंफ्रा पर हमले का कितना असर पड़ सकता है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि वैश्विक गैस भंडार का करीब 25% हिस्सा यहीं से जुड़ा हुआ है। वहीं एलएनजी बिजनेस का करीब 20% हिस्सा यहां के एक्सपोर्ट हब से होकर गुजरते हैं तो वैश्विक तेल का करीब 20% हिस्सा भी यहां से होकर गुजरता है। सबसे बड़ा असर तो सप्लाई टाइमलाइन पर पड़ रहा है। सबसे बड़ा झटका तो यही है कि अगर होर्मेज स्ट्रेट यानी होर्मेज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से चालू भी हो जाता है तो इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले और सावधानी के तौर पर बंदी के चलते अगले कुछ महीने तक एलएनजी की सप्लाई अगले कुछ महीने तक सीमित रह सकती है।