'युद्ध खत्म करने वाली हर पहल का स्वागत', ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, अमेरिका पर लगाए कई गंभीर आरोप

पश्चिम एशिया युद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध खत्म करने वाली किसी भी पहल का स्वागत होगा। साथ ही अमेरिका और इजरायल पर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 7:50 PM
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ईरान का कहना है कि अमेरिका उसके शहेद-136 ड्रोन के रीब्रांड वर्जन का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे 'लुकास' नाम दिया गया है।

पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा है कि उनका मुल्क किसी भी ऐसी पहल का स्वागत करेगा, जो युद्ध को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़े।

समचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि अब्बास ने कहा कि अगर कोई कोशिश इस संघर्ष का 'पूरा अंत' कर सकती है तो ईरान उसका समर्थन करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में एक तरफ लड़ाई जारी है और दूसरी तरफ ईरान अमेरिका और इजरायल को लगातार चेतावनी भी दे रहा है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नेतन्याहू को दी धमकी


इससे पहले ईरान की सेना की शक्तिशाली इकाई- इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को सीधी धमकी दी। गार्ड्स ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि अगर यह 'बच्चों का हत्यारा अपराधी' जिंदा है, तो ईरान पूरी ताकत के साथ उसे मार गिराने की कोशिश करेगा।

ईरान ने अमेरिका को भी चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर आगे भी हमले की धमकी दी थी। इसके जवाब में ईरान ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह अमेरिका को जवाब देगा। ईरान ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात से हमले किए हैं, हालांकि इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया।

ड्रोन हमलों को लेकर नए आरोप

ईरान ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि अमेरिका उसके शहेद-136 ड्रोन के रीब्रांड वर्जन का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे 'लुकास' नाम दिया गया है। ईरान का दावा है कि इन ड्रोन से तथाकथित 'फॉल्स स्ट्राइक' किए जा रहे हैं, ताकि इन हमलों का दोष ईरान पर डाला जा सके।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे क्षेत्र में नागरिक ढांचे पर हुए हमलों की जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने तुर्की, कुवैत और इराक जैसे पड़ोसी देशों में हुए कुछ हमलों को 'संदिग्ध' बताया। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि इन ड्रोन का इस्तेमाल जानबूझकर ईरान को फंसाने के लिए किया जा रहा है।

अराघची ने यह भी कहा कि इजरायल अजरबैजान में ड्रोन हमलों की साजिश रच रहा है ताकि ईरान के विदेशी रिश्तों को नुकसान पहुंचाया जा सके। वहीं सऊदी अरब में ईरान के राजदूत Alireza Enayati ने रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए कथित हमले में तेहरान की किसी भी भूमिका से इनकार किया।

खाड़ी देशों में नए मिसाइल और ड्रोन हमले

रविवार को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने नए मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी दी। बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी कि सुरक्षा एजेंसियां आने वाले प्रोजेक्टाइल को रोकने की कोशिश कर रही हैं।

यह चेतावनी ऐसे समय आई जब एक दिन पहले ईरान ने यूएई के तीन बड़े बंदरगाहों को खाली करने की चेतावनी दी थी। ईरान ने पहली बार किसी पड़ोसी देश की उन संपत्तियों को निशाना बनाने की धमकी दी है जो सीधे अमेरिकी सैन्य ढांचे से जुड़ी नहीं हैं।

हालांकि संयुक्त अरब अमीरात और दूसरे खाड़ी देशों ने यह आरोप खारिज किया है कि उनके इलाके या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया। क्षेत्र में हुए ईरानी हमलों में कम से कम एक दर्जन नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें ज्यादातर प्रवासी मजदूर बताए जा रहे हैं।

ईरान युद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंचा

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। उनका कहना था कि इन हमलों का निशाना परमाणु और सैन्य ठिकाने हैं। साथ ही उन्होंने ईरान की जनता से अपने नेतृत्व के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील भी की थी।

इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीड अली खामेनेई (Ali Khamenei) की भी मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और कई खाड़ी देशों पर हमले शुरू कर दिए।

अब हालात यह हैं कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बंद कर दिया है और उस पर नियंत्रण कर लिया है। इस वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से तेल निर्यात प्रभावित हुआ है, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ने लगी हैं।

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