US Iran War: 6 लाख सैनिकों के सामने 17,000 कमांडो होंगे काफी, ईरान में जमीनी युद्ध करना ट्रंप का होगा 'मास्टरस्ट्रोक' या 'सुसाइड'?

US Iran War: ईरान की सेना अभी भी बहुत बड़ी, मजबूत और अच्छी तरह जुड़ी हुई है। इसमें नियमित सेना, एलीट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और पैरामिलिट्री मिलिशिया शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गहराई और विविधता के कारण कोई भी जमीनी ऑपरेशन बहुत खतरनाक होगा। इसलिए अमेरिकी प्लानर सावधानी बरत रहे हैं

अपडेटेड Mar 28, 2026 पर 6:29 PM
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US Iran War: 6 लाख ईरानी सैनिकों से टकराने के लिए 17,000 कमांडो होंगे काफी (FILE PHOTO)

ईरान के साथ बढ़ता युद्ध अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर रहा है। अगर ट्रंप हरी झंडी दे दें, तो अमेरिका जल्द ही ईरान की सीमा पर 17,000 से ज्यादा सैनिक तैनात कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने यह रिपोर्ट दी है। ये संख्या पूरे ईरान पर कब्जा करने के लिए काफी नहीं है, लेकिन ये सैनिक ईरान के मुख्य भूमि पर कुछ महत्वपूर्ण इलाकों या किसी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश कर सकते हैं। साथ ही तेहरान के यूरेनियम भंडार को भी सुरक्षित करने की कोशिश हो सकती है।

ट्रंप के लिए यह फैसला आसान लग सकता है। लेकिन एक महीने के ईरान युद्ध ने पूरी दुनिया को एक बात सिखा दी है- तेहरान हार मानने को तैयार नहीं है। हफ्तों तक हवाई हमलों और उसके कई बड़े नेताओं के मारे जाने के बावजूद ईरान नहीं झुक रहा।

ईरान की सेना अभी भी बहुत बड़ी, मजबूत और अच्छी तरह जुड़ी हुई है। इसमें नियमित सेना, एलीट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और पैरामिलिट्री मिलिशिया शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गहराई और विविधता के कारण कोई भी जमीनी ऑपरेशन बहुत खतरनाक होगा। इसलिए अमेरिकी प्लानर सावधानी बरत रहे हैं।


ईरान की बड़ी और व्यवस्थित जमीनी सेना

ईरान की सशस्त्र सेनाएं मध्य पूर्व की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक हैं। इसमें नियमित सेना (आर्टेश) और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स दोनों शामिल हैं।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास 6 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं। इनमें करीब 3.5 लाख नियमित आर्मी के सैनिक और लगभग 1.9 लाख IRGC के सैनिक हैं। इसके अलावा बड़े रिजर्व फोर्स भी हैं।

आर्टेश में जमीनी सेना, नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस शामिल हैं। जबकि IRGC के पास अपनी अलग जमीनी सेना, नौसेना और बहुत ताकतवर कुद्स फोर्स है, जो विदेशी ऑपरेशनों को संभालती है।

हालांकि, ईरान के कई हथियार पुराने हैं, लेकिन उसके पास बड़ी संख्या में तोपें, बख्तरबंद गाड़ियां, एंटी-एयर और मिसाइल सिस्टम हैं, जो उसके इलाके की रक्षा कर सकते हैं।

मिसाइलें, ड्रोन और अन्य हथियार

ईरान की लड़ने की ताकत सिर्फ सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके मिसाइल और ड्रोन सिस्टम से भी आती है। ये उसके डिफेंस का मुख्य हिस्सा हैं।

अनादोलु एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास क्षेत्र की सबसे बड़ी और विविध मिसाइलों का भंडार है। इसमें हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं, जो लंबी दूरी तक मार सकती हैं। ये मिसाइलें सुरक्षित और अंडरग्राउंड जगहों पर रखी गई हैं, इसलिए हवाई हमलों से इन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है।

अमेरिका और सहयोगी देशों के हवाई हमलों से ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। फिर भी, सूत्रों के मुताबिक केवल एक तिहाई मिसाइलें ही पूरी तरह नष्ट हुई हैं। बाकी में से कुछ क्षतिग्रस्त या दब गई होंगी, जबकि बची हुई मिसाइलें अभी भी काम कर सकती हैं।

इसी ताकत के कारण ईरान क्षेत्रीय लक्ष्यों पर ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रख पा रहा है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण रास्तों को बाधित कर सकता है।

ईरान की सेना की गहराई क्यों मायने रखती है?

भले ही ईरान कमजोर हुआ हो, लेकिन उसकी सेना की गहराई किसी भी जमीनी ऑपरेशन को बहुत जोखिम भरा बना देती है।

ईरान में जमीन पर घुसने पर अमेरिकी सेना को बड़ी, फैली हुई और अच्छी तरह जुड़ी सेना का सामना करना पड़ेगा। ईरानी सेना, IRGC और मिलिशिया घरेलू जमीन और पहाड़ी इलाकों में सामान्य लड़ाई के साथ-साथ छापामार हमले भी कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई हमलों से मिसाइल और ड्रोन का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए किसी भी कब्जे वाली सेना को बहुत मजबूत सुरक्षा और खास रणनीति की जरूरत होगी।

इसी वजह से अमेरिकी अधिकारी, जिनमें मार्को रूबियो भी शामिल हैं, सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि वे ईरान के अंदर लड़ाकू सैनिक भेजे बिना ही अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। फिर भी वे क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करके लचीलापन और रोकथाम बनाए रखना चाहते हैं।

अमेरिका के पास अब क्या विकल्प हैं?

पूरी तरह जमीन पर आक्रमण करने के बजाय, अमेरिका के शीर्ष अधिकारी ईरान की मिसाइल, ड्रोन, नौसेना और वायु क्षमता को सटीक हवाई हमलों से कमजोर करने पर जोर दे रहे हैं।

इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा नौसेना और वायुसेना से की जा सकती है। अगर जरूरी हुआ तो कुछ सीमित जमीनी मिशन भी चलाए जा सकते हैं ताकि महत्वपूर्ण सुविधाओं को सुरक्षित किया जा सके। अमेरिका क्षेत्रीय सहयोगी देशों की मदद भी ले सकता है ताकि उसका सीधा जमीनी दखल कम रहे।

यह रणनीति इसलिए अपनाई जा रही है क्योंकि ईरान की सेना की गहराई और असामान्य लड़ाई की क्षमता किसी भी कब्जे या बड़े जमीनी ऑपरेशन को लंबा, जटिल और बहुत खतरनाक बना देगी- भले ही हवाई हमलों से तेहरान कमजोर दिख रहा हो।

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