ईरान युद्ध की कितनी कीमत चुका रहे बेंजामिन नेतन्याहू? सैन्य ताकत के बाद भी दांव पर लगी सबसे अहम चीज
Israel Iran War: इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज इंस्टीट्यूट के ईरान विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविज ने कहा, “नेतन्याहू जीत नहीं रहे हैं। यह युद्ध रणनीतिक रूप से असफल रहा है। शुरू में उन्होंने जो वादे किए थे, उस और अब की स्थिति में बहुत बड़ा फर्क है।” इस युद्ध पर इजरायल पहले ही करीब 11.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। नेतन्याहू अब लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि युद्ध की कीमत चुकाने लायक थी
Israel Iran War: ईरान युद्ध की कितनी कीमत चुका रहे बेंजामिन नेतन्याहू? मजबूत सैन्य ताकत के बावजूद दांव पर लगी सबसे अहम चीज
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ युद्ध को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत बनाने की कोशिश की थी। उनका सपना था कि इस युद्ध से तेहरान को करारी हार मिलेगी और वे इतिहास में याद किए जाएंगे। लेकिन युद्ध शुरू हुए छह हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं, और अब तक नेतन्याहू सैन्य ताकत को राजनीतिक फायदे में नहीं बदल पाए हैं। इजरायल के पास भारी हथियार और ताकत है, फिर भी उसके दुश्मन हर मोर्चे पर कमजोर तो हुए हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
अमेरिका और इजरायल के भारी हवाई हमलों के बावजूद ईरान अभी भी मजबूत और लड़ने को तैयार है। उसके परमाणु स्टॉक बरकरार हैं, उसकी मिसाइल क्षमता साबित हो चुकी है और वह दुनिया के तेल का एक बड़ा रास्ता- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण रखता है। गाजा में हमास अभी भी हथियार नहीं छोड़ पाया है और लेबनान से ईरान समर्थित हिजबुल्लाह इजरायल पर रॉकेट दाग रहा है।
Reuters के मुताबिक, इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज इंस्टीट्यूट के ईरान विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविज ने कहा, “नेतन्याहू जीत नहीं रहे हैं। यह युद्ध रणनीतिक रूप से असफल रहा है। शुरू में उन्होंने जो वादे किए थे, उस और अब की स्थिति में बहुत बड़ा फर्क है।”
नेतन्याहू की लोकप्रियता घटी
76 साल के नेतन्याहू को इस युद्ध की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ रही है। क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शुरू किए गए इस अभियान से उन्हें कोई निर्णायक फायदा नहीं हुआ।
नेतन्याहू की लोकप्रियता (अप्रूवल रेटिंग) गिर गई है। अक्टूबर के आखिर तक चुनाव होने हैं, इसलिए उनके सामने राजनीतिक खतरा बढ़ रहा है। नेतन्याहू ने उन लोगों की आलोचना की है, जो इजरायल की उपलब्धियों को कम आंक रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यहां बहुत बड़ी उपलब्धियां हैं। हमने ईरान का परमाणु कार्यक्रम कुचल दिया, मिसाइलें कुचल दीं और ताकतवर शासन को कमजोर कर दिया।”
युद्ध शुरू होने पर नेतन्याहू ने ईरान के लोगों से कहा था कि वे सड़कों पर उतरकर अपने धार्मिक नेताओं को सत्ता से हटा दें। लेकिन अब इजरायल के सुरक्षा अधिकारी मान रहे हैं कि ऐसा जल्दी होने वाला नहीं है।
दो इजरायली अधिकारियों ने बताया कि शुरू में उम्मीद थी कि तीन हफ्तों में “काम पूरा” हो जाएगा। लेकिन युद्ध अब और फैल गया है और पूरे क्षेत्र व दुनिया पर असर डाल रहा है।
हवाई ताकत पर निर्भरता
पूर्व सलाहकार अविव बुशिंस्की ने कहा कि ईरान युद्ध की शुरुआत में नेतन्याहू की छवि सुधरी थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद खराब हुई थी।
लेकिन अब पोल दिखा रहे हैं कि उनकी लोकप्रियता फिर गिर गई है। 11 अप्रैल के एक सर्वे में सिर्फ 10% इजरायलियों ने युद्ध को सफल बताया, जबकि नेतन्याहू का समर्थन 34% रह गया (शुरू में 40% था)।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हवाई हमलों से कुछ फायदे तो हुए, लेकिन यह कोई स्थायी रणनीतिक जीत नहीं बन पाया।
एक विशेषज्ञ ने कहा, “यह गलत धारणा है कि F-15 और F-35 लड़ाकू विमानों से मध्य पूर्व को नया रूप दिया जा सकता है। सिर्फ ईरानी नेताओं को मारने से शासन नहीं गिरता।”
बुशिंस्की ने कहा कि टारगेट किलिंग (निशाना लगाकर हत्या) से भी फायदा नहीं हो रहा क्योंकि एक के बाद दूसरा नेता आ जाता है। “यह भालू को जगाता है, मारता नहीं।”
युद्ध की कीमत
इस युद्ध पर इजरायल पहले ही करीब 11.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। नेतन्याहू अब लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि युद्ध की कीमत चुकाने लायक थी। लेकिन क्षेत्र के कूटनीतिज्ञों का कहना है कि बिना बड़ी जीत के उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान को लगता है कि वह अमेरिका के साथ युद्ध झेल सकता है और होर्मुज की खाड़ी को बंद करके दुनिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
एक विशेषज्ञ ने कहा, “जिन्नी बोतल से बाहर निकल चुका है। अब ईरान पहले से ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा है और ज्यादा मांग कर रहा है।”
सबसे बड़ा नुकसान खाड़ी के अरब देशों को हो रहा है, क्योंकि अब उन्हें और सख्त और कट्टर ईरानी नेतृत्व से निपटना पड़ेगा।