Ayatollah Ali Khamenei: 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। अब एक सनसनीखेज रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने खामेनेई तक पहुंचने के लिए ईरान के ट्रैफिक कैमरों के जाल का इस्तेमाल किया था। ईरानी शासन ने पूरे तेहरान में ट्रैफिक कैमरों का जाल इसलिए बिछाया था ताकि प्रदर्शनकारियों और विरोधियों पर नजर रखी जा सके। लेकिन 'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने इन कैमरों को सालों पहले हैक कर लिया था।
ईरान के अपने ही कैमरे बने काल
इजरायल ने एक ऐसे कैमरे को ट्रैक किया, जिसका एंगल खामेनेई की सुरक्षा टीम की कारों की पार्किंग की ओर था। कैमरों की मदद से इजरायल ने खामेनेई के बॉडीगार्ड्स के घर के पते, उनकी ड्यूटी का समय और उनकी पूरी प्रोफाइल तैयार कर ली थी। इस पूरे ऑपरेशन में सिर्फ हैकिंग ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी बड़ा हाथ था।
इजरायल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और खास एल्गोरिदम का उपयोग करके भारी-भरकम डेटा का विश्लेषण किया, जिससे खामेनेई की हर हलचल पर नजर रखी गई। रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पास एक ऐसा 'ह्यूमन सोर्स' भी था, जिसने अंदरूनी और सटीक जानकारी मुहैया कराई।
हमले का दिन जाम कर दिया था सेल्युलर नेटवर्क
शनिवार को जब खामेनेई एक सीक्रेट मीटिंग के लिए निकले, तो उनकी किस्मत का फैसला हो चुका था। हमले के वक्त तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट जहां खामेनेई मौजूद थे वहां पर सेल्युलर सर्विस पूरी तरह जाम कर दी गई थी। जैमिंग की वजह से जब खामेनेई पर हमला हुआ, तो सुरक्षाकर्मियों को चेतावनी देने के लिए किए गए फोन कॉल्स केवल 'बिजी टोन' देते रहे।
'हम तेहरान को यरूशलेम की तरह जानते थे'
एक इजरायली खुफिया अधिकारी ने बड़े गर्व से कहा कि वे तेहरान की गलियों को उतनी ही अच्छी तरह जानते थे जितना कि अपनी खुद की गलियों को। इसी गहरी जानकारी की वजह से वे सुरक्षा में जरा सी भी चूक या बदलाव को तुरंत भांप लेते थे और इसी का नतीजा था कि खामेनेई का अभेद्य किला ढह गया।