मिडिल ईस्ट जंग से बांग्लादेश में मचा हड़कंप, पेट्रोल-डीजल को लेकर मची मारामारी, सरकार ने लगाई पाबंदियां

बांग्लादेश सरकार ने फ्यूल की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए राशनिंग सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत वाहनों को सीमित मात्रा में ही फ्यूल दिया जा रहा है। इसके बावजूद ढाका के कई पेट्रोल पंपों पर लोग रात भर लाइन में खड़े रहे। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों का फ्यूल भी खत्म हो गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई

अपडेटेड Mar 08, 2026 पर 7:31 PM
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इजरायल-ईरान जंग से इस देश में पेट्रोल-डीजल को लेकर मची मारामारी

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगा है। खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण बांग्लादेश में ईंधन का संकट गहराने लगा है। बांग्लादेश में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोगों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार, रविवार को कई जगहों पर लोग घबराहट में ज्यादा मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदने लगे, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं। कई कार मालिकों और ड्राइवरों को अपनी गाड़ियों के लिए फ्यूल लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

बांग्लादेश सरकार ने लागू किया ये नियम

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने फ्यूल की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए राशनिंग सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत वाहनों को सीमित मात्रा में ही फ्यूल दिया जा रहा है। इसके बावजूद ढाका के कई पेट्रोल पंपों पर लोग रात भर लाइन में खड़े रहे। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों का फ्यूल भी खत्म हो गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। मिडिल ईस्ट में में चल रहे तनाव की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में तेजी आई है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी थी कि वे होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर देंगे। यह समुद्री रास्ता बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया में समुद्र के जरिए भेजे जाने वाले लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।


बांग्लादेश क्यों मुश्किल में है?

बांग्लादेश अपनी जरूरत का लगभग 95% फ्यूल ऑयल और करीब 70% गैस विदेशों से मंगाता है, जिसमें ज्यादातर आपूर्ति मिडिल ईस्ट से होती है। इसी वजह से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर बांग्लादेश पर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, गैस की कमी के कारण देश की छह में से पांच उर्वरक (फर्टिलाइजर) फैक्ट्रियां 18 मार्च तक बंद कर दी गई हैं। इससे खेती और उद्योग पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

इस स्थिति ने देश में बड़े फ्यूल संकट की चिंता पैदा कर दी है। खास बात यह है कि बांग्लादेश में पिछले महीने ही नई सरकार बनी है, और ऐसे समय में यह संकट सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। युद्ध के कारण फ्यूल की मांग तेजी से बढ़ गई है, जिसके चलते बांग्लादेश के कई इलाकों में लोग घबराहट में ज्यादा मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदने लगे हैं। इससे कई जगहों पर पैनिक बाइंग की स्थिति बन गई है।

ढाका में बनी नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की कीमतें और बढ़ने का खतरा है। इससे बांग्लादेश का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व) पर भी दबाव पड़ सकता है।

अगर फ्यूल की सप्लाई में रुकावट जारी रहती है, तो इसका असर बांग्लादेश के बड़े उद्योगों पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर गारमेंट इंडस्ट्री, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कपड़ा उद्योगों में से एक है, उसे नुकसान होने की आशंका है। प्रोथोम एलो की रिपोर्ट के अनुसार, कई पेट्रोल पंपों पर फ्यूल खत्म हो गया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। एक ड्राइवर ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, “हमें बताया गया कि दोपहर 2 बजे से पहले फ्यूल नहीं मिलेगा। लेकिन अभी भी सरकारी गाड़ियों को पेट्रोल दिया जा रहा है। आम लोगों को नहीं दिया जा रहा। क्या हम इस देश में पराए हैं?”

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