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Explained: क्या पश्चिम एशिया में हो जाएगी पानी की किल्लत? तेल से शुरू हुआ युद्ध वाटर प्लांट्स तक पहुंचा

पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब तेल ठिकानों से आगे बढ़कर पानी के डीसैलिनेशन प्लांट तक पहुंच गया है। अगर ये प्लांट प्रभावित हुए तो खाड़ी देशों में पीने के पानी की गंभीर किल्लत पैदा हो सकती है। जानिए डिटेल।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Mar 08, 2026 पर 8:17 PM
Explained: क्या पश्चिम एशिया में हो जाएगी पानी की किल्लत? तेल से शुरू हुआ युद्ध वाटर प्लांट्स तक पहुंचा
कई खाड़ी देशों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा डीसैलिनेशन प्लांट्स से ही आता है।

पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इजरायल और ईरान अब केवल सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि उन अहम ढांचों को निशाना बना रहे हैं जिन पर आम लोगों की जिंदगी और अर्थव्यवस्था टिकी होती है। पहले दोनों पक्षों ने तेल डिपो और फ्यूल स्टोरेज को निशाना बनाया, लेकिन अब हमले पानी की सप्लाई से जुड़े सिस्टम तक पहुंच गए हैं।

यह स्थिति इसलिए और गंभीर है क्योंकि इस क्षेत्र के करोड़ों लोग पीने के पानी के लिए समुद्र के पानी को साफ करके बनाए जाने वाले पानी यानी डीसैलिनेशन पर निर्भर हैं। ऐसे में डीसैलिनेशन प्लांट्स पर हमला संघर्ष को और खतरनाक बना सकता है।

तेल डिपो से पानी के सिस्टम तक

हाल ही में इजरायल ने ईरान के फ्यूल स्टोरेज ठिकानों पर हमले किए, जिससे वहां बड़े पैमाने पर आग लग गई और आसमान में धुएं के गुबार दिखाई दिए। मध्य पूर्व में युद्ध के दौरान तेल डिपो और स्टोरेज टैंक हमेशा से रणनीतिक लक्ष्य रहे हैं क्योंकि ये अर्थव्यवस्था और सैन्य लॉजिस्टिक्स दोनों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। लेकिन अब ईरान की प्रतिक्रिया ने एक और संवेदनशील क्षेत्र को सामने ला दिया है।

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