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मालदीव के डीप सी केव में डाइव करने गए 5 डाइवर्स की मौत! इस खौफनाक मामले की डिटेल जानिए

Maldive Cave Diving accident : खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार बाधित हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक हवाएं 25 से 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं, जिससे समुद्र के अंदर विजिबिलिटी बेहद कम हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच में से कम से कम चार गोताखोर इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े थे।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 16, 2026 पर 5:40 PM
मालदीव के डीप सी केव में डाइव करने गए 5 डाइवर्स की मौत! इस खौफनाक मामले की डिटेल जानिए
मालदीव के वावू एटोल में समुद्र के नीचे गुफाओं की खोज के दौरान बड़ा हादसा हो गया।

मालदीव के वावू एटोल में समुद्र में स्कूबा डाइविंग दौरान बड़ा हादसा हो गया। अंडरवॉटर एक्सप्लोरेशन पर गए इटली के पांच अनुभवी गोताखोरों की मौत हो गई है। वहीं हादसे के बाद मालदीव में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह देश के इतिहास की सबसे भयावह डाइविंग दुर्घटनाओं में से एक है। इस हादसे में समुद्री जीवविज्ञानी और उनकी बेटी की भी मौत हो गई है। एसोसिएटेड प्रेस और इतालवी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक केवल एक शव ही बरामद किया जा सका है।

खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार बाधित हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक हवाएं 25 से 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं, जिससे समुद्र के अंदर विजिबिलिटी बेहद कम हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच में से कम से कम चार गोताखोर इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े थे। जियानलुका बेनेडेट्टी बोट ऑपरेशंस मैनेजर थे और उनका शव ही अब तक बरामद हो पाया है। मोनिका मोंटेफाल्कोने मरीन बायोलॉजिस्ट थीं और यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा में ट्रॉपिकल मरीन इकोलॉजी और अंडरवॉटर साइंस की प्रोफेसर थीं। वह मालदीव में चल रहे एक आइलैंड मॉनिटरिंग अभियान की वैज्ञानिक निदेशक भी थीं।

क्या होता है स्कूबा डाइविंग

बता दें कि, स्कूबा डाइविंग का एक बेहद कठिन और जोखिम भरा प्रकार होता है। इसमें गोताखोर पानी के अंदर मौजूद गुफाओं और बंद जगहों की खोज करते हैं। सामान्य समुद्री डाइविंग से यह काफी अलग होती है। खुले पानी में किसी आपात स्थिति में गोताखोर सीधे ऊपर आ सकता है, लेकिन गुफा डाइविंग में बाहर निकलने का रास्ता तुरंत नहीं मिलता। इस तरह की डाइविंग पूरी तरह अंधेरे और बेहद तंग जगहों में की जाती है। गोताखोरों को सीमित ऑक्सीजन के साथ काम करना पड़ता है और बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होता है। इसमें “सिल्ट-आउट” का भी बड़ा खतरा रहता है। इसका मतलब है कि नीचे जमी मिट्टी या तलछट हिलने पर पानी में अचानक इतनी धुंध फैल जाती है कि कुछ भी दिखाई देना बंद हो जाता है।

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