LNG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध ने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। पुतिन ने संकेत दिया है कि रूस, यूरोप को होने वाली गैस सप्लाई पूरी तरह बंद करने पर विचार कर सकता है। इस बयान के बाद यूरोपीय बाजारों में गैस की कीमतें 50% से ज्यादा उछल गई हैं।
पुतिन की चेतावनी या सोची समझी रणनीति?
रूसी राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा, 'शायद हमारे लिए यह सही होगा कि हम अभी यूरोपीय बाजारों को गैस की सप्लाई रोक दें।' हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि, 'यह अभी कोई फैसला नहीं है, मैं बस जोर से सोच रहा हूं।' पुतिन ने कहा कि यूरोप रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है, लेकिन रूस के लिए 'नए बाजार खुल रहे हैं'। विशेषज्ञों का मानना है कि जब मिडिल ईस्ट के कारण पहले ही सप्लाई चेन टूटी हुई है, तब पुतिन का यह बयान यूरोप को पूरी तरह घुटनों पर लाने की कोशिश है।
यूरोप में क्यों मची है त्राहि-त्राहि?
यूरोप में गैस की कीमतों में लगी आग का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट है। दुनिया की 20% LNG और तेल इसी रास्ते से गुजरती है। ईरान युद्ध के कारण कतर ने अपनी LNG सप्लाई इस हफ्ते रोक दी है। कतर यूरोपीय संघ (EU) की गैस जरूरतों का 6% हिस्सा पूरा करता है। सोमवार को यूरोपीय गैस की कीमतें 48.66 यूरो प्रति मेगावाट घंटा तक पहुंच गईं। कीमतों में यह 50% से ज्यादा की बढ़त है, जिसने यूरोपीय सरकारों की नींद उड़ा दी है। यूरोपीय संघ के गैस और तेल से जुड़े समूहों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए आपातकालीन बैठकें की हैं।
यूरोप की रूसी गैस पर है कितनी निर्भरता?
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूस पर निर्भरता कम करने की काफी कोशिश की है, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह मुक्त नहीं है। अब नॉर्वे (30%) और अमेरिका (58% LNG) यूरोप के सबसे बड़े सप्लायर बन गए हैं। हालांकि, फ्रांस, स्पेन और बेल्जियम अब भी रूस से भारी मात्रा में LNG आयात कर रहे हैं। EU ने जनवरी 2026 में एक कानून पास किया है जिसके तहत 2027 के अंत तक रूसी गैस को पूरी तरह प्रतिबंधित करना है।
यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद रूस अब अपनी गैस का रुख चीन, भारत और अन्य एशियाई देशों की ओर कर रहा है। पुतिन जानते हैं कि अगर उन्होंने अभी सप्लाई काटी, तो मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के कारण यूरोप के पास फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।