मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध की आग अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगी है। ईरान और इजरायल के बीच हो रही भीषण गोलाबारी के कारण भारत के 11 जहाज समुद्र में फंस गए हैं, जिनमें से दो जहाजों में LPG लदी हुई है। इस रुकावट ने देश में गैस की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान-इजरायल युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही भारत के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी के कारण भारत की 60 प्रतिशत LPG सप्लाई रुक गई है। सरकार ने अब घरेलू रसोई को बचाने के लिए कमर्शियल गैस सप्लाई में भारी कटौती कर दी है।
समुद्र में क्या है स्थिति?
CNN-News18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया, कुल 11 भारतीय जहाज युद्ध क्षेत्र में फंसे हैं। इनमें 'जग वसंत' (Jag Vasant) और 'पाइन गैस' (Pine Gas) नाम के दो जहाज शामिल हैं, जिनमें LPG भरी हुई है।
ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के चीफ अली लारीजानी की मौत के बाद वहां फैसला लेने वाला कोई नहीं है, जिससे जहाजों को निकालने में देरी हो रही है। भारतीय नौसेना लगातार उनके संपर्क में है।
भारत में क्या बदल गया है?
गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने 'प्रायोरिटी लिस्ट' तैयार की है।
आम लोगों के घरों में खाना पकता रहे, इसके लिए सरकार ने सारा स्टॉक रिजर्व कर दिया है। होटलों और रेस्टोरेंट्स को मिलने वाली गैस में भारी कटौती की गई है। सरकार ने राज्यों से कहा है कि जो शहर PNG (पाइप वाली गैस) का नेटवर्क जल्दी बिछाएंगे, उन्हें 10% अतिरिक्त कमर्शियल गैस दी जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस खत्म नहीं हुई है, लेकिन आयात रुकने से स्थिति "चिंताजनक" है। लोगों से अपील की गई है कि वे ऑनलाइन बुकिंग के बाद घर पर ही सिलेंडर का इंतजार करें और डीलरों के पास भीड़ न लगाएं।
LPG की कमी ने कई उद्योगों और सेवाओं की कमर तोड़ दी है। कई होटलों ने अपने मेन्यू से वे डिश हटा दी हैं, जिन्हें पकाने में ज्यादा समय और गैस लगती है। ईंट-भट्टे, कांच उद्योग और सिरेमिक फैक्ट्रियों में काम ठप होने की कगार पर है।
अस्पतालों की रसोई, श्मशान घाट और लॉन्ड्री जैसी सेवाओं को भी गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का समाधान: PNG अपनाएं
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने लोगों से अपील की है कि जहां भी मुमकिन हो, LPG से हटकर PNG (Piped Natural Gas) पर शिफ्ट हो जाएं। सिटी गैस कंपनियां इसके लिए नए कनेक्शन पर इंसेंटिव (छूट) भी दे रही हैं।