ईरान के साउथ पार्स गैस प्लांट पर इजरायल का हमला, ट्रंप प्रशासन ने दी मंजूरी! क्या अब ठप हो जाएगी ईरान की बिजली?

Middle East War: दो वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों ने Axios को पुष्टि की है कि यह हमला डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर और उनकी मंजूरी के बाद किया गया है। यह पहली बार है, जब अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान के आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए हरी झंडी दी है

अपडेटेड Mar 18, 2026 पर 7:45 PM
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ईरान के गैस प्लांट पर इजरायल की 'सर्जिकल स्ट्राइक', ट्रंप प्रशासन की मंजूरी के बाद दहला साउथ पार्स (FILE PHOTO)

मिडिल ईस्ट की जंग अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है जहां सीधे तौर पर एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इजरायली वायुसेना ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक बड़े नेचुरल गैस प्रोसेसिंग प्लांट पर भीषण हमला किया है। इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब सैन्य ठिकानों से निकलकर 'एनर्जी वॉर' में बदल गया है। दो वरिष्ठ इजरायली अधिकारियों ने Axios को पुष्टि की है कि यह हमला डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर और उनकी मंजूरी के बाद किया गया है। यह पहली बार है, जब अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान के आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए हरी झंडी दी है।

कहां हुआ हमला और कितना नुकसान?

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, निशाना ईरान का सबसे महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस फील्ड था। बुशहर प्रांत के इस खास आर्थिक क्षेत्र में कई मिसाइलें गिरीं, जिससे वहां भीषण आग लग गई।


फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमें आग बुझाने में जुटी हैं। ईरान ने इसे "अमेरिकी-जायोनी दुश्मन" की कायराना हरकत बताया है।

यह हमला इतना 'बड़ा' क्यों है?

अब तक इजरायल सिर्फ ईरान के सैन्य अड्डों या परमाणु ठिकानों के आसपास हमला कर रहा था, लेकिन गैस प्लांट को चुनना एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है

साउथ पार्स ईरान की अर्थव्यवस्था और घरेलू ऊर्जा सप्लाई (बिजली और हीटिंग) की रीढ़ है। इसे तबाह करने का मतलब है पूरे ईरान को अंधेरे में धकेलना।

पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन तेल डिपो पर हमले के खिलाफ था, लेकिन अब गैस प्लांट पर हमले को मंजूरी देना दिखाता है कि अमेरिका अब ईरान पर 'अधिकतम दबाव' की नीति अपना रहा है।

क्या यह युद्ध अपराध है?

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून यानी जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, किसी भी देश के आर्थिक ढांचे पर हमला करना पेचीदा मामला है। अगर यह साबित हो जाए कि इस गैस का इस्तेमाल सेना के लिए हो रहा था, तो इसे वैध माना जा सकता है।

लेकिन अगर इस हमले से आम जनता की बिजली-पानी बंद होती है या लंबे समय तक उनका जीवन प्रभावित होता है, तो इसे 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में रखा जा सकता है।

अब आगे क्या होगा?

जानकारों का मानना है कि ईरान अब इजरायल के गैस प्लेटफॉर्म (जैसे लेविआथन या तामार) को निशाना बना सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो पूरे भूमध्य सागर क्षेत्र में ऊर्जा का संकट खड़ा हो जाएगा और दुनिया भर में गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

वैसे ईरान अपने गैस प्लांट पर हुए हमले के बाद खाड़ी देशों पर पलटवार करने की खुली धमकी दी है। साथ लोगों को गैस प्लांट से दूर रहने की भी सलाह दी गई है।

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