पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने साफ किया है कि अभी उसकी सेना तेल टैंकरों को सुरक्षा देते हुए होर्मुज स्ट्रेट से नहीं ले जा सकती। अमेरिका का कहना है कि फिलहाल उसकी सैन्य ताकत का पूरा ध्यान ईरान के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने गुरुवार को एक इंटरव्यू में कहा कि इस समय अमेरिकी सेना का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य ताकत और उससे जुड़े उद्योगों को कमजोर करना है। इसलिए अभी व्यापारिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा देना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था भविष्य में शुरू हो सकती है, लेकिन फिलहाल सेना तैयार नहीं है। उनका कहना था कि संभव है कि महीने के आखिर तक अमेरिका तेल टैंकरों को सुरक्षा देकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकालने की व्यवस्था शुरू करे।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि तेल कंपनियों को होर्मुज के रास्ते से ही जहाज भेजने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक ऐसा कोई पुख्ता संकेत नहीं मिला है कि ईरान ने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
हालांकि अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने हाल ही में बताया कि उसने 16 ईरानी नावों को नष्ट कर दिया है, जिन पर शक था कि वे समुद्र में माइन यानी बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थीं।
अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में माइन बिछाई गईं तो उसके गंभीर सैन्य परिणाम हो सकते हैं। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन अभी तक अमेरिकी नौसेना ने शिपिंग कंपनियों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया है, जिसमें उन्होंने जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने की बात कही थी।
इस बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ने लगा है। कई जहाज कंपनियां इस रास्ते से गुजरने में हिचकिचा रही हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।