Laura Loomer: ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम पर ट्रंप के समर्थकों में दो-फाड़, लौरा लूमर ने कहा- 'अमेरिका के लिए फायदेमंद नहीं है यह समझौता'

US-Iran Ceasefire: लूमर ने 'X' पर लिखा कि इस बातचीत से अमेरिका को कुछ हासिल नहीं हुआ है और ईरान के आतंकी इसका जश्न मना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप के विरोधी इस बातचीत का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं और 25वें संशोधन यानी राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 9:38 AM
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कुछ रिपब्लिकन इसे 'शांति की ओर कदम' मान रहे हैं, तो कुछ इसे 'आतंकियों के आगे झुकना' करार दे रहे हैं

US-Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं उनकी अपनी पार्टी और समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर दो फाड़ नजर आ रहे हैं। कुछ इसे 'शांति की ओर कदम' मान रहे हैं, तो कुछ इसे 'आतंकियों के आगे झुकना' करार दे रहे हैं। ट्रंप की कट्टर समर्थक मानी जाने वाली दक्षिणपंथी कमेंटेटर लौरा लूमर ने इस समझौते की कड़ी निंदा की है।

'यह अमेरिका के लिए नुकसानदेह है'

दक्षिणपंथी कमेंटेटर लौरा लूमर को ट्रंप का कट्टर समर्थक माना जाता है। उन्होंने ईरान-अमेरिका के बीच हुए इस 15 दिन के सीजफायर समझौते की कड़े शब्दों में निंदा की है। लूमर ने 'X' पर लिखा कि इस बातचीत से अमेरिका को कुछ हासिल नहीं हुआ है और ईरान के आतंकी इसका जश्न मना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप के विरोधी इस बातचीत का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं और 25वें संशोधन यानी राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। लूमर का मानना है कि यह संघर्ष विराम विफल होगा और अंततः ईरान के शासन को खत्म करना ही एकमात्र रास्ता बचेगा।


रिपब्लिकन नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

लिंडसे ग्राहम: सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि वह इस समझौते को लेकर 'बेहद सतर्क' हैं। उन्होंने मांग की कि इस डील की कांग्रेस द्वारा उसी तरह समीक्षा की जानी चाहिए जैसे ओबामा के दौर में ईरान डील की हुई थी। उन्होंने कहा, 'सच और कल्पना के बीच के अंतर को समझना जरूरी है।'

रिक स्कॉट: सीनेटर रिक स्कॉट ने इसे ट्रंप की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह 'ताकत के जरिए शांति' स्थापित करने का उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जाएंगे और होर्मुज का रास्ता खुला रहना चाहिए।

व्हाइट हाउस का दावा: '38 दिनों में हासिल किए सैन्य लक्ष्य'

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस डील को अमेरिका की बड़ी सफलता करार दिया है। लेविट ने कहा कि ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत सैन्य अभियान के लिए 4-6 हफ्ते का अनुमान लगाया था, लेकिन अमेरिकी जांबाजों ने मात्र 38 दिनों में ही मुख्य सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लिया है। सरकार का मानना है कि सैन्य दबाव की वजह से ही ईरान बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है।

ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट और पाकिस्तान का रोल

राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर बताया कि यह फैसला कैसे हुआ। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर उन्होंने ईरान पर होने वाले 'विनाशकारी हमले' को टाल दिया है। यह दो हफ्ते का संघर्ष विराम इस शर्त पर है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलेगा।

ईरान का क्या है रुख?

तेहरान से आए बयानों के मुताबिक, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस दो हफ्ते के संघर्ष विराम को स्वीकार कर लिया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि शुक्रवार से पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी।

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