ट्रंप की 'ईरान डील' पर भड़का इजरायल! नेतन्याहू के अरमानों पर फिरा पानी, क्या मिडिल ईस्ट में मचेगा नया महाविनाश?

Israel On Trump US Iran Deal: रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और ईरान के बीच आकार ले रहा यह समझौता उन सभी लक्ष्यों की धज्जियां उड़ाता है, जिन्हें हासिल करने के लिए इजरायल ने तेहरान के खिलाफ मोर्चा खोला था। इजरायली एक्सपर्ट्स और विपक्षी नेताओं का मानना है कि ट्रंप ने अपनी जीत दिखाने के चक्कर में इजरायल की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 9:11 AM
यह डील उन सभी लक्ष्यों की धज्जियां उड़ाता है, जिन्हें हासिल करने के लिए इजरायल ने तेहरान के खिलाफ मोर्चा खोला था

Israel Reacts to US-Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस 'शांति समझौते' का ढिंढोरा पीटकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, उसने इजरायल के राजनीतिक और सुरक्षा महकमे में भूचाल ला दिया है। इजरायल के सबसे लोकप्रिय हिब्रू अखबार 'येदियुत अहारोनोत' ने अपने संडे एडिशन की मुख्य हेडलाइन में सिर्फ दो शब्द- 'बैड डील' लिखकर इजरायल का गुस्सा जाहिर कर दिया है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और ईरान के बीच आकार ले रहा यह समझौता उन सभी लक्ष्यों की धज्जियां उड़ाता है, जिन्हें हासिल करने के लिए इजरायल ने तेहरान के खिलाफ मोर्चा खोला था। इजरायली एक्सपर्ट्स और विपक्षी नेताओं का मानना है कि ट्रंप ने अपनी जीत दिखाने के चक्कर में इजरायल की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। आइए समझते हैं कि इस मिडिल ईस्ट युद्ध में इस 'तूफानी' मोड़ के बाद इजरायल में इतना गुस्सा क्यों है और कैसे यह डील नए महायुद्ध का सबब बन सकती है।

1. क्या है ट्रंप की वो डील, जिससे इजरायल के उड़े होश?


अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, वह इजरायल के लिए किसी झटके से कम नहीं है:

60 दिनों का नया सस्पेंस: यह समझौता इस साल अप्रैल में हुए युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए और बढ़ा देगा। इस दौरान अमेरिका और ईरान परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने को लेकर गोपनीय और विस्तृत बातचीत करेंगे।

लेन-देन का खेल शुरू: शुरुआती मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के तहत, ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खोल देगा। इसके बदले में, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी अपनी सख्त आर्थिक और नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लेगा।

2. नेतन्याहू के तीन बड़े वादे, जिन्हें ट्रंप ने किया 'इग्नोर'

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध की शुरुआत में देश की जनता से वादा किया था कि वे ईरान से जुड़े 'अस्तित्व के खतरे' को हमेशा के लिए मिटा देंगे। लेकिन ट्रंप की ईरान डील ने इन तीनों मोर्चों पर पानी फेर दिया है:

परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम पर चुप्पी: इजरायल का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना था। लेकिन इस डील के सार्वजनिक हुए विवरणों में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का कोई जिक्र ही नहीं है।

प्रॉक्सी नेटवर्क्स को खुली छूट: इजरायल ने मांग की थी कि तेहरान अपने पाले हुए आतंकी और हथियारबंद गुटों जैसे- लेबनान में हिज़्बुल्लाह, यमन में हुथी और गाजा में हमास को फंडिंग और हथियार देना बंद करे। ट्रंप की इस डील में ईरान के इस 'प्रॉक्सी नेटवर्क' को रोकने का कोई साफ मैकेनिज्म ही नहीं है।

ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना टूटा: नेतन्याहू का मानना था कि इस जंग के जरिए ईरान के अंदर राजनीतिक तख्तापलट की स्थितियां बनेंगी, लेकिन इस डील ने ईरानी सरकार को नई संजीवनी दे दी है।

3. इजरायली नेताओं की खुली चेतावनी: 'यह इजरायल के लिए तबाही है'

जहां एक तरफ ट्रंप इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत की तरह पेश कर रहे हैं, वहीं इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार याकोव नागेल ने चेतावनी दी है कि इजरायल के अस्तित्व से जुड़े मुख्य मुद्दों को बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह गायब कर दिया गया है। इजरायल के विपक्षी नेता तो और भी ज्यादा आक्रामक हैं:

एविग्डोर लिबरमैन (पूर्व रक्षा मंत्री): 'यह तथाकथित शांति प्रस्ताव इजरायल के राष्ट्रीय हितों के लिए एक बहुत बड़ी 'तबाही' है'।

याइर लैपिड (विपक्षी नेता): 'अगर ये खबरें सच हैं, तो यह इजरायल की विदेश और सुरक्षा नीति की अब तक की सबसे बड़ी और शर्मनाक नाकामी है।'

4. लेबनान और हिज़्बुल्लाह फ्रंट पर फंसा असली पेंच

इस डील का सबसे खतरनाक असर लेबनान में जारी इजरायली सैन्य अभियान पर पड़ सकता है। फरवरी के आखिर में शुरू हुई इस जंग में ईरान की चाल यह है कि किसी भी शांति समझौते में लेबनान और हिज़्बुल्लाह को भी शामिल किया जाए। इसके उलट, इजरायल चाहता है कि हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उसका मोर्चा तेहरान के साथ होने वाली वार्ताओं से अलग रहे। ट्रंप की डील इन दोनों फ्रंट्स को आपस में जोड़ती दिख रही है, जिससे इजरायल के हाथ बंध जाएंगे।

5. नेतन्याहू की मजबूरी: अक्टूबर चुनाव और ट्रंप का डर

इजरायल में अक्टूबर 2026 के अंत में आम चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में नेतन्याहू पर अपनी ही गठबंधन सरकार के सहयोगियों और विपक्ष का भारी दबाव है कि वे वाशिंगटन के आगे घुटने न टेकें। यही वजह है कि नेतन्याहू खुलकर ट्रंप की आलोचना नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि वे ट्रंप को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक मददगार बताते आए हैं।

बीते शुक्रवार को अपनी मजबूरी छिपाते हुए नेतन्याहू ने सिर्फ इतना कहा कि 'जब तक मैं पीएम हूं, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा और ट्रंप भी मेरे साथ हैं।' लेकिन उन्होंने मिसाइलों और हिज़्बुल्लाह के मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली।

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