दुनिया भर में भूकंप की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। नेपाल में एक बार फिर से भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। लोग घर छोड़कर बाहर की ओर भागने लगे। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई है। भारत के इस पड़ोसी देश में भूकंप आने से लोग दहशत में आ गए हैं। ये भूकंप उस समय आया जब लोग सो रहे थे। उन्हें एहसास हुआ कि उनके पलंग हिल रहे हैं।
एनसीएस के अनुसार, नेपाल में भूकंप 25 किमी की गहराई पर आया। इसकी वजह से तेज झटके महसूस किए गए। NCS के मुताबिक, ये भूकंप सुबह 4: 30 बजे आया। वहीं जापान में भी भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई है।
धरती के ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी हैं। जहां भी ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं। वहां भूकंप का खतरा पैदा हो जाता है। भूकंप तब आता है, जब ये प्लेट्स एक-दूसरे के क्षेत्र में घुसने की कोशिश करती हैं। ऐसे में जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर होती हैं। तब ऐसी स्थिति में जमीन हिलने लगती है। इसे ही भूकंप कहा जाता है। इसके अलावा उल्का प्रभाव और ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। इस स्केल पर 2.0 या 3.0 की तीव्रता का भूकंप हल्का होता है, जबकि 6 की तीव्रता का मतलब शक्तिशाली भूकंप होता है।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।