नेपाल में 'बालेन' तूफान: रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह रचने जा रहे हैं इतिहास, दिग्गज नेताओं का सूपड़ा साफ, पीएम की कुर्सी के करीब

Nepal Elections Result 2026: हिंसात्मक Gen Z प्रदर्शनों के बाद नेपाल में हुए पहले आम चुनावों के नतीजे चौंकाने वाले हैं। शुरुआती रुझानों और नतीजों ने नेपाल की पुरानी और स्थापित पार्टियों के वर्चस्व को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। बालेंद्र शाह की पार्टी RSP एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही है

अपडेटेड Mar 07, 2026 पर 12:36 PM
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Nepal Elections Result: नेपाल में 'बालेन' तूफान: रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह रचने जा रहे हैं इतिहास

नेपाल की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है, जिसने दशकों से राज कर रहे पुराने दिग्गजों के पैर उखाड़ दिए हैं। रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह उर्फ बालेन की नई पार्टी, 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP), देश के पहले आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है।

हिंसात्मक Gen Z प्रदर्शनों के बाद नेपाल में हुए पहले आम चुनावों के नतीजे चौंकाने वाले हैं। शुरुआती रुझानों और नतीजों ने नेपाल की पुरानी और स्थापित पार्टियों के वर्चस्व को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। बालेंद्र शाह की पार्टी RSP एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही है।

चुनावी आंकड़े: भारी बढ़त


नेपाल चुनाव आयोग की तरफ से जारी 165 में से 161 निर्वाचन क्षेत्रों के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 24 सीटें, नेपाली कांग्रेस ने चार सीटें, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) ने दो सीटें और CPN-UML ने 31 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक सीट जीती है। नेपाली कांग्रेस और CPN-UML जैसी पारंपरिक पार्टियां इस आंधी में टिक नहीं पा रही हैं।

प्रतिनिधि सभा चुनावों के परिणाम अभी भी आ रहे हैं। 30 निर्वाचन क्षेत्रों के अंतिम परिणाम आज (शनिवार) सुबह 9:40 बजे घोषित किए गए।

दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली की करारी हार!

सबसे बड़ा उलटफेर 'झापा-5' निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला है, जो पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का गढ़ माना जाता था। बालेंद्र शाह ने ओली के खिलाफ 15,000 से अधिक वोट हासिल कर लिए हैं।

चार बार प्रधानमंत्री रह चुके ओली को अब तक केवल 3,300 वोट मिले हैं। यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

कौन हैं बालेंद्र शाह 'बालेन'?

35 साल के बालेंद्र शाह एक पेशेवर इंजीनियर और मशहूर रैपर रहे हैं। हाल तक वे काठमांडू के मेयर थे, जहां उनके काम करने के अंदाज ने युवाओं को बहुत प्रभावित किया।

नेपाल ने पिछले 18 सालों में 14 सरकारें देखी हैं। बार-बार बदलती सरकारों और भ्रष्टाचार से तंग आकर जनता ने इस बार 'बदलाव' के लिए वोट दिया है।

क्या होंगे इसके मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि बालेंद्र शाह का प्रधानमंत्री बनना तय है। यह जीत न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति को बदलेगी, बल्कि भारत और चीन के साथ नेपाल के रिश्तों में भी एक नया अध्याय जोड़ेगी। युवा पीढ़ी ने साफ कर दिया है कि वे अब पुराने ढर्रे की राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।

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