Nepal: बालेन शाह के पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली गिफ्तार, समर्थकों की पुलिस से झड़प

नेपाल के अंतरिम सरकार द्वारा बनाए गए आयोग ने “जेन जी” आंदोलन की जांच की थी। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में के. पी. शर्मा ओली समेत अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि ओली उस गोलीबारी को रोकने में नाकाम रहे, जिसमें विरोध प्रदर्शन के पहले ही दिन कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई थी

अपडेटेड Mar 28, 2026 पर 7:57 PM
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पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

नेपाल में नई सरकार बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने काठमांडू के कई इलाकों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने “जेन जी” आंदोलन की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट की प्रतियां जलाकर अपना गुस्सा जताया।

केपी ओली की गिरफ्तारी 

केपी. ओली को शनिवार तड़के सितंबर 2025 में हुए “जेन जी” विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से जुड़े एक गैर-इरादतन हत्या (कुल्पेबल होमिसाइड) के मामले में गिरफ्तार किया गया। इन्हीं प्रदर्शनों के बाद उन्हें अपने पद से हटना पड़ा था। इस मामले में रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है।


आयोग ने दिया था ये रिपोर्ट

नेपाल के अंतरिम सरकार द्वारा बनाए गए आयोग ने “जेन जी” आंदोलन की जांच की थी। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में के. पी. शर्मा ओली समेत अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि ओली उस गोलीबारी को रोकने में नाकाम रहे, जिसमें विरोध प्रदर्शन के पहले ही दिन कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई थी। गिरफ्तारी के बाद 74 वर्षीय ओली—जिनके दो बार किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं को मेडिकल जांच के बाद काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” बताया है। पार्टी ने आगे की रणनीति तय करने के लिए एक आपात बैठक भी बुलाई है।

के. पी. शर्मा ओली के समर्थकों ने च्यासल में स्थित नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के केंद्रीय कार्यालय के पास “कार्की आयोग” की रिपोर्ट जलाकर और टायरों में आग लगाकर विरोध जताया। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर पुलिस की मौजूदगी काफी कम देखी गई। इस बीच नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव भी देखने को मिला है। रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह, जिन्हें “बालन” के नाम से भी जाना जाता है, ने शुक्रवार को देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का नेता सर्वसम्मति से चुना गया था। हाल ही में हुए आम चुनाव में शाह ने झापा-5 सीट से के. पी. शर्मा ओली को हराकर जीत हासिल की थी। वहीं के. पी. शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन और मौजूदा राजनीतिक बदलाव, नेपाल की तेजी से बदलती राजनीति में बढ़ते तनाव को साफ तौर पर दिखाते हैं।

‘राजनीतिक बदला’ का आरोप

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेताओं ने के. पी. शर्मा ओली की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की है। पार्टी के सचिव महेश बसनेत ने इसे “राजनीतिक बदला” बताया और बालेंद्र शाह की सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। पार्टी ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें ओली की तुरंत रिहाई की मांग की गई। साथ ही, देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान भी किया गया। इन प्रदर्शनों के तहत जिला मुख्यालयों पर रैलियां निकाली जाएंगी और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस मामले पर अन्य नेताओं ने भी चिंता जताई है। अर्जुन नरसिंह केसी ने कहा कि इस पूरे मामले की “निष्पक्ष और पारदर्शी” जांच होनी चाहिए। उन्होंने पहले हुई जांच के नतीजों को भी “अपर्याप्त” बताया।

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