नेपाल में अब नए 'रोमियो-जूलियट' कानून को लेकर शुरू हो गई कंट्रोवर्सी, क्या है ये पूरा मामला?

नेपाल के राष्ट्रीय आपराधिक कोड में एक ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी चल रही है। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस 'रोमियो-जूलियट' क्लॉज को लाने का मुख्य उद्देश्य वैधानिक बलात्कार (Statutory Rape) के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकना है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां टीनएजर्स आपसी सहमति से रिश्ते में आते हैं या फिर अलग-अलग जातियों (Inter-Caste Couples) में शादी या प्रेम करते हैं

अपडेटेड May 20, 2026 पर 7:37 PM
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नेपाल में अब नए 'रोमियो-जूलियट' कानून को लेकर शुरू हो गई कंट्रोवर्सी, क्या है ये पूरा मामला?

पड़ोसी देश नेपाल में इस समय एक नया कानून बनने से पहले ही चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गया है। इस कानून को मीडिया और कानूनी गलियारों में रोमियो-जूलियट क्लॉज कहा जा रहा है। दरअसल, नेपाल सरकार अपने क्रिमिनल लॉ (आपराधिक कानून) में एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत किशोरों (टीनएजर्स) के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों को सीधे रेप के मामले के रूप में दर्ज होने से रोका जा सके। इस प्रस्तावित संशोधन को लेकर जहां एक तरफ युवा कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञ इसे समय की मांग बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाल और महिला अधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताते हुए एक नई बहस छेड़ दी है।

आपको बता दें कि नेपाल के राष्ट्रीय आपराधिक कोड में एक ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी चल रही है। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस 'रोमियो-जूलियट' क्लॉज को लाने का मुख्य उद्देश्य वैधानिक बलात्कार (Statutory Rape) के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकना है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां टीनएजर्स आपसी सहमति से रिश्ते में आते हैं या फिर अलग-अलग जातियों (Inter-Caste Couples) में शादी या प्रेम करते हैं।

आखिर क्यों मौजूदा कानून को बदलना चाहती है नेपाल सरकार?


नेपाल के वर्तमान कानूनी ढांचे में कुछ विसंगतियां हैं। इसकी वजह से ये लंबे समय से आलोचना का शिकार रही हैं। नेपाल में आपसी सहमति से संबंध बनाने की कानूनी उम्र 18 वर्ष है, लेकिन कानूनी रूप से शादी करने की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष है। इस विरोधाभास के कारण कई कानूनी पेचीदगियां खड़ी होती हैं। मौजूदा कानून के तहत, अगर कोई भी व्यक्ति 18 वर्ष से कम उम्र का है, तो उसके साथ आपसी सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध भी स्वतः 'स्टैच्यूटरी रेप' (वैधानिक बलात्कार) की श्रेणी में आ जाता है। कानूनन माना जाता है कि 18 से कम उम्र के बच्चे सहमति देने के योग्य नहीं हैं।

इस मामले की जांच के लिए गठित सरकारी टास्क फोर्स ने पाया कि जब भी कोई टीनएज लड़का-लड़की आपसी सहमति से भागकर शादी कर लेते हैं या अंतर-जातीय संबंध बनाते हैं, तो लड़की के परिवार वाले आपसी रंजिश या पारिवारिक विवाद के चलते लड़के के खिलाफ 'स्टैच्यूटरी रेप' का मुकदमा दर्ज करा देते हैं। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा कानून नाबालिगों को शोषण से बचाने के बजाय आपसी सहमति वाले किशोर संबंधों का अपराधीकरण कर रहा है।

क्या है प्रस्तावित रोमियो-जूलियट क्लॉज और कैसे करेगा काम?

इस नए कानून के तहत उन किशोरों को कानूनी राहत या कम सजा की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है, जो हमउम्र हैं। प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक अगर संबंध बनाने वाले दोनों व्यक्ति किशोर (संभावित रूप से 16-18 वर्ष की आयु के) हैं और उनके बीच उम्र का फासला 3 वर्ष से अधिक नहीं है, तो आपसी सहमति से बने संबंध को सीधे रेप नहीं माना जाएगा। इसमें सजा को बेहद कम या सीमित छूट देने का प्रावधान होगा।

ड्राफ्ट तैयार करने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह सुरक्षात्मक छूट केवल तभी लागू होगी जब दोनों ही टीनएजर्स हों। यह कदम संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति के अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। सरकार ने साफ किया है कि इस क्लॉज से रेप विरोधी कानून कमजोर नहीं होंगे। जबरदस्ती, डराने-धमकाने, ब्लैकमेलिंग, शोषण और वयस्कों द्वारा नाबालिगों के साथ बनाए जाने वाले संबंधों पर पहले की तरह ही सख्त आपराधिक धाराएं और कड़ी सजा बरकरार रहेगी।

विवाद और बहस की मुख्य वजह क्या है?

नेपाल के कानून, न्याय और संसदीय कार्य मंत्रालय के तहत गठित एक टास्क फोर्स ने सुप्रीम कोर्ट और कानूनी विशेषज्ञों के इनपुट के साथ इस ड्राफ्ट को तैयार किया है। फिलहाल यह प्रस्ताव कैबिनेट के रिव्यू में है और संसद में इस पर चर्चा चल रही है।

इसके साथ ही नेपाल में शादी की उम्र को 20 से घटाकर 18 करने पर भी बहस जारी है। युवा संगठनों और कानून सुधार के समर्थकों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कानून बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को दर्शाता है और उन बेकसूर किशोर लड़कों को जेल जाने से बचाएगा जो किसी दुर्भावना या शोषण के इरादे के बिना सहमति से रिश्ते में थे।

दूसरी तरफ, बाल अधिकार और महिला अधिकार संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आलोचकों का डर है कि स्टैच्यूटरी रेप कानून में किसी भी तरह की ढील देने से समाज में बाल विवाह, जबरदस्ती और युवा लड़कियों के शोषण को बढ़ावा मिल सकता है। उन्हें डर है कि अपराधी इस 'उम्र के फासले' वाले नियम का फायदा उठाकर बच निकलने का रास्ता ढूंढ सकते हैं, जिससे लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कवच कमजोर हो जाएंगे।

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